दून अस्पताल में इंदिरा अम्मा भोजनालय (कैंटीन) में परोसी जाने वाली थाली से लोगों का पेट नहीं भर पा रहा है। महंगाई के इस दौर में कैंटीन में बीस रुपये में थाली परोसी जाती है। प्रदेश सरकार की ओर से प्रति थाली सब्सिडी राशि नहीं बढ़ाए जाने पर कैंटीन संचालन करने वाली संस्था ने रोटियों का साइज छोटा कर दिया है। कैंटीन में आमजन को सस्ता और हाइजेनिक खाना तो मिल रहा है, लेकिन रोटी का आकार छोटा होने से पेट नहीं भर रहा है। आम लोग थाली में रोटी और संस्था सब्सिडी बढ़ाने की मांग कर रही है।
दून अस्पताल की यह कैंटीन कोरोनाकाल के पहले ही बंद हो गई थी। कैंटीन के संचालक उमेश सेमवाल ने बताया कि कैंटीन में प्रति थाली 20 रुपये परोसी जाती है। हर थाली पर सरकार से कैंटीन संचालन करने वाली संस्था को 10 रुपये सब्सिडी मिलती है। राशन से लेकर गैस आदि सब महंगा हो गया है। थाली में खाने की क्वालिटी पर कोई समझौता नहीं कर रहे हैं। क्वांटिटी पर समझौता करना मजबूरी है। महंगाई के इस दौरा में 10 रुपये सब्सिडी पर कैंटीन चलाना मुश्किल हो रहा है। लिहाजा, सरकार को प्रति थाली सब्सिडी बढ़ाकर 20 रुपये करने की जरूरत है।
2015 में शुरू हुई थी योजना
वर्ष 2015 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में 20 रुपये में इंदिरा अम्मा थाली उपलब्ध कराने की योजना शुरू हुई थी। घंटाघर स्थित एमडीडीए काॅम्पलेक्स, सचिवालय, आईएसबीटी ट्रांसपोर्टनगर, विकास भवन और दून अस्पताल में इंदिरा अम्मा कैंटीन शुरू की गई थीं। ये सभी कैंटीन अभी चल रही हैं। इन कैंटीन के संचालन का जिम्मा महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया जाता है।
आठ साल वाला रेट अभी भी चल रहा
कैंटीन संचालक आशा सेमवाल बताती हैं, योजना शुरू होने के समय थाली और सब्सिडी का जो रेट था आठ साल बाद भी वही है। उस समय से अब तक महंगाई बहुत बढ़ गई है। ऐसे में सरकार को प्रति थाली सब्सिडी 10 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये देने चाहिए। कैंटीन संचालन के लिए स्वयं सहायता समूह के साथ 12 महीने का अनुबंध होता है। अनुबंध को बढ़ाकर दो साल करना चाहिए।
थाली में परोसा जाता है ये खाना
20 रुपये की थाली में चार रोटी, चावल, दाल, सब्जी, चटनी या अचार दिया जाता है।