करीब 12 दिन पहले श्रवण को अस्पताल से छुट्टी मिली तो वह उसे घर ले आए। श्रवण के घर आते ही पुलिस आ गई और उसे पकड़ कर ले गई। इसके बाद उसे जेल में बंद कर दिया गया। जेल वह उससे कई बार मिलने गए। जहां उसने उन्हें बताया था कि वह बहुत ज्यादा तकलीफ में है। जेल में उसका उपचार नहीं कराया जा रहा है। उससे कुछ खाया पिया भी नहीं जा रहा है।
परिजनों ने जेल प्रशासन से उसका ठीक से उपचार कराए जाने की भी मांग की थी लेकिन उनकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्हें बताया गया कि उसे अस्पताल में भर्ती कराकर उसका उपचार कराया जा रहा है, लेकिन उसे कहीं पर भी भर्ती नहीं कराया गया था। उपचार न मिलने की वजह से श्रवण की मौत हुई है। अस्पताल की इमरजेंसी में उनका उपचार कराया गया है।
जेल में बंद विचाराधीन बंदी की हेड इंजरी पहले से ही थी और उसका उपचार चल रहा था। उसे हायर सेंटर के लिए रेफर किया था, लेकिन उससे पहले ही सुबह उसकी मौत हो गई।
- जेपी द्विवेदी, जेल अधीक्षक, रुड़की उपकारागार