दून विश्वविद्यालय से स्नातक करने वाले छात्रों को इस साल भूगोल और भूगर्भ विज्ञान का विकल्प भी मिलेगा। यही नहीं, नई शिक्षा नीति के तहत इनमें ऑनर्स के साथ रिसर्च की डिग्री भी मिलेगी।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने बताया कि ये दोनों कोर्स नई शिक्षा नीति के तहत शुरू हो रहे हैं। ऐसे में अब भूगोल और भूगर्भ विज्ञान की यूजी डिग्री मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत यूजी में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि जिस विषय में पीजी होता था, उनमें कॅरिअर की दृष्टि से बहुत अधिक संभावनाएं नजर नहीं आती हैं। अब इनमें बदलाव के तहत यूजी में ही ऑनर्स के साथ रिसर्च की डिग्री भी दी जाएगी।
चौथे साल में जाने वाले छात्र पीएचडी के लिए होंगे तैयार
विवि के प्रोफेसर एचसी पुरोहित ने बताया कि दोनों कोर्स में तीन साल पूरा होने पर ऑनर्स की डिग्री मिलेगी। जिन छात्रों का सीजीपीए 7.5 से कम होगा, उन्हें चौथे साल में प्रवेश नहीं मिलेगा। वे अन्य जगह से पीजी कर सकते हैं। सीजीपीए 7.5 या इससे अधिक रहेगा तो छात्र को चौथे साल में प्रवेश मिलेगा। यहां छात्र को रिसर्च का मौका मिलेगा और रिसर्च की डिग्री भी दी जाएगी। चौथे साल में जाने वाले छात्र पीएचडी करने के लिए तैयार हो जाएंगे। नई शिक्षा नीति के तहत इस तरह के ये पहले कोर्स होंगे।
सिर्फ बीए या बीएससी कहना सही नहीं
प्रोफेसर सुरेखा ने बताया कि इस कोर्स को सामान्य रूप से बीए या बीएससी कहना सही नहीं होगा। अब तक जो मास्टर्स की डिग्री दो साल की होती थी, वह चौथे साल वाले छात्रों को एक ही साल में दे दी जाएगी। फिलहाल इनमें 25-25 सीट निर्धारित करने की रूपरेखा बन रही है। अधिक छात्र होने पर पढ़ाई में बाधा हो सकती है।
नई शिक्षा नीति के तहत कोर्स
बीए ऑनर्स विद रिसर्च इन जियोग्रॉफी, बीएससी ऑनर्स विद रिसर्च इन जियोलॉजी