शिक्षा और उद्योग के लिए मशहूर पछवादून नशे की गिरफ्त में आ रहा है, जो चिंता का विषय है। स्थिति का अंजादा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में पुलिस ने नशे की तस्करी से संबंधित 187 मुकदमे दर्ज किए हैं और 229 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इनके पास से करीब 10 किग्रा चरस, 3 किग्रा स्मैक और 26 किग्रा से अधिक गांजा आदि बरामद हो चुके हैं। दुखद तस्वीर यह भी है कि नशा तस्करों के निशाने पर हमेशा छात्र और श्रमिक रहते हैं।
राज्य गठन के बाद पछवादून एजुकेशन के हब के रूप में विकसित हुआ। साथ ही बड़ी संख्या में सेलाकुई, रामपुर और लांघा रोड पर औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुई। इसी के साथ यहां नशा तस्कर भी सक्रिया हो गए। तस्करों ने कंपनी में काम करने वाले श्रमिकों के साथ ही विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के बीच पैठ बनाई। देखते ही देखते क्षेत्र में नशा तस्कर सक्रिय हो गए।
आंकड़ों पर गौर करें तो कोतवाली विकासनगर पुलिस ने बीते छह माह में एनडीपीएस के 14 मुकदमे दर्ज कर चुकी है, जिसमें पुलिस 20 से अधिक नशा तस्करों को जेल भेज चुकी है। इन नशा तस्करों से करीब 2.951 किग्रा चरस, 77.28 ग्राम स्मैक और 53.53 किग्रा डोटा पोस्त बरामद हुआ।
सेलाकुई पुलिस ने करीब एक साल में 50 मुकदमे दर्ज कर करीब 86 नशा तस्करों को जेल भेजा। जिनसे करीब 450 ग्राम स्मैक, दो किग्रा चरस, 18.900 किग्रा गांजा बरामद किया। सहसपुर पुलिस ने एक साल में 123 मुकदमे दर्ज किए। जिसमें 131 तस्करों को जेल भेजा। करीब पांच किग्रा चरस, करीब दो किग्रा स्मैक, 7 किग्रा गांजा, 10 किग्रा डोडा पोस्त के साथ ही बड़ी संख्या नशीले कैप्सूल बरामद किए। सामाजिक कार्यकर्ता सुंदर थापा का कहना है कि नशे पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की सख्ती से ज्यादा जागरूकता की जरूरत है।
नशा एक सामाजिक बुराई है। जिस पर समाज के सहयोग से ही प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। उत्तराखंड को नशा मुक्त करने के लिए उत्तराखंड पुलिस प्रतिबद्ध है। जिसके तहत ड्रग्स फ्री देवभूमि ऑपरेशन लांच किया गया है। अब तक कई तस्करों को जेल भेजा जा चुका है। सामाजिक संगठनों का सहयोग लेकर भी लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। - भास्कर शाह, पुलिस क्षेत्राधिकारी, विकासनगर
जनजागरूकता से नशाखोरी पर लगी लगाम
सहसपुर थाना क्षेत्र का खुशहालपुर गांव कभी नशाखोरी के लिए जाना जाता था, लेकिन ग्राम प्रधान सादिक रहमान और ग्रामीणों के सहयोग से आज गांव में नशाखोरी बहुत कम हो गई है। ग्राम प्रधान ने बताया कि गांव में नशे का चलन ज्यादा था। युवा नशे के जाल में फंस रहे थे। कुछ लोग नशे की तस्करी में संलिप्त थे। आए दिन गांव में पुलिस की दबिश पड़ती थी। जिसे देखते हुए ग्रामीणों ने सामाजिक परिवर्तन संस्था का गठन किया। गांव के युवाओं को समझाया। नशे के खात्मे के लिए पुलिस का सहयोग किया। आज स्थिति यह है कि गांव में नशाखोरी में 80 फीसदी की कमी आई है। संस्था के माध्यम से युवाओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है।