रिमोट सेंसिंग व जीआईएस तकनीकों के वजूद में आने के बाद सतही जल, भूजल, ग्लेशियरों के अध्ययन में काफी मदद मिली है। इन तकनीकों से जल की गुणवत्ता और जल की मात्रा दोनों से संबंधित आंकड़े प्राप्त कर उनका विश्लेषण करने के साथ ही जलस्रोतों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा सकता है।
उक्त बातें जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर पीके जोशी ने कहीं। प्रो. जोशी यूसर्क की ओर से जल संसाधनों के अध्ययन और प्रबंधन विषय पर आयोजित सेमिनार में व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने उत्तराखंड राज्य के विभिन्न जलस्रोतों का अध्ययन प्रस्तुत करते हुए बताया कि ये सभी तकनीक जल संसाधनों के अध्ययन और नीति निर्धारण में अत्यंत उपयोगी हैं।
तीन दिवसीय सेमिनार के अंतिम दिन उत्तराखंड जल संस्थान के देहरादून स्थित राज्य स्तरीय जल गुणवत्ता प्रयोगशाला के वरिष्ठ तकनीकी प्रबंधक डॉ. विकास कंडारी ने स्पेक्ट्रो फोटोमीटर से जल की गुणवत्ता के विभिन्न पैरामीटर्स का विश्लेषण विषय पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम के समापन पर यूसर्क निदेशक ने सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किए। इस मौके पर यूसर्क के वैज्ञानिक डॉ. भवतोष शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह राणा, यूसर्क की निदेशक प्रो. डॉ. अनीता रावत, डॉ. मंजू सुंदरियाल, डॉ. भवतोष शर्मा, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. कंचन बहुखंडी आदि मौजूद रहे।