फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीनोम सिक्वेंसिंग में कोरोना के नए वैरिएंट की पुष्टि न होने से राहत

विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच उत्तराखंड से राहत वाली खबर है। वह यह कि राजकीय दून मेडिकल कालेज की लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए पंद्रह सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग में किसी नए वैरिएंट की पुष्टि नहीं हुई है। प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना ने बताया कि कॉलेज में गत 21 नवंबर से जीनोम सिक्वेंसिंग की व्यवस्था की गई थी। अब तक जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए 118 सैैंपल मिले हैैं। उन्होंने बताया कि जीनोम सिक्वेंसिंग की पूरी प्रक्रिया में छह से सात दिन का समय लगता है। प्रथम बैच में 18 सैैंपल लगाए गए। जिनमें तीन की सिक्वेंसिंग फेल हो गई। बाकी 15 सैैंपल में छह में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इनमें तीन सैैंपल देहरादून, दो हरिद्वार व एक पौड़ी गढ़वाल का है। इन छह लोगों में तीन को ही अस्पताल जाना पड़ा है। बाकि सैैंपल में अन्य म्यूटेशन पाए गए हैैं, जो सामान्य हैैं। 100 सैैंपल की जांच अभी होनी है। जिनमें 57 सैैंपल देहरादून, 35 नैनीताल, पांच अल्मोड़ा, दो टिहरी व एक हरिद्वार से है। प्राचार्य ने बताया कि लैब में अब तक 4.63 लाख आरटीपीसीआर जांच की गई हैै। जिसमें 23,511 की रिपोर्ट पाजीटिव आई।वहीं, अब तक कम सैंपल आने के कारण जीनोम सिक्वेंसिंग के परिणाम जल्द आने में दिक्कत हो रही थी। दरअसल, जीनोम सिक्वेसिंग की जांच कोरोना संक्रमित मरीजों के 20, 80 और 120 नमूनों के स्लॉट में होती है। कालेज प्रशासन ने सभी जिलों के सीएमओ, एम्स ऋषिकेश और मेडिकल कॉलेजों को पत्र लिखकर कोरोना संक्रमित सभी मरीजों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की लैब भेजने को पत्र लिखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें