बड़ी संख्या में वाहनों की छत पर सवार थे श्रद्धालु
मंदिरों को रूट पर रही सवारी वाहनों की कमी
जागड़ा पर्व को लेकर प्रशासन ने सवारी वाहनों का किराया तो तय कर दिया, लेकिन क्षमता से अधिक सवारी बैठाने को लेकर दिशानिर्देश जारी नहीं किए है। सवारी वाहन सुबह से क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर चल रहे थे, वहीं वाहनों की छतों पर भी लोगों को बैठाया जा रहा था। सवारी वाहनों के कमी के चलते वाहनों की छतों पर सफर करना श्रद्धालुओं की मजबूरी भी बनी हुई थी।
जौनसार बाबर के प्रमुख त्योहारों में से एक जागड़ा के अवसर पर क्षेत्र के प्रमुखतम मंदिरों हनोल थैना, लखवाड बिसोई और दसोऊ में विशेष पूजा अनुष्ठान होता है। मंदिरों में दर्शन के लिए स्थानीय और प्रवासी श्रद्धालु परिवार सहित दर्शन करने आते हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा आदि राज्यों के भी श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के पहुंचते हैं।
प्रमुख त्योहार के अवसर पर भी सार्वजनिक वाहनों की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की जाती है। जिसके कारण लोगों को मजबूरन अपनी जान जोखिम में डालकर ओवरलोडेड हल्के सार्वजनिक वाहनों में सफर करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों प्रताप नेगी, मोहर सिंह आदि का कहना है कि जागड़ा जैसे पर्वों पर अतिरिक्त सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि लोग सुविधाजनक और सुरक्षित रूप से धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकें।
उप जिलाधिकारी कालसी, चकराता एवं त्यूणी युक्ता मिश्र ने बताया कि निजी बसों के संचालन पर हल्का मोटर वाहन समिति एतराज करती है। बताया कि इसी कारण रोडवेज बसों की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।