नगर निगम की ओर से शहर को स्वच्छ रखने के लिए योजनाएं तो तैयार की जाती हैं, लेकिन नियमित मॉनिटरिंग न होने के कारण योजनाएं धरातल पर उतरती ही नहीं हैं। अगर उतरती भी हैं तो कुछ ही दिनों में डंप हो जाती हैं।
मेरी लाइफ, मेरा स्वच्छ शहर को ही लीजिए, इसके तहत रिसाइकिल, रिड्यूज, रियूज थीम पर अनुपयोगी वस्तुओं को निस्तारण किया जाना था। लेकिन अभियान हवाई साबित हुआ। योजना के तहत जो 50 केंद्र खोले जाने का दावा किया गया, वह न तो आमजन को मिले न क्षेत्रीय पार्षद को।
दून में काफी ऐसा कूड़ा भी जनरेट होता है जिसको रिसाइकल, रियूज और रिड्यूज किया जा सकता है। इसमें कपड़े, पुरानी किताबें, स्टेशनरी, खिलौने, फर्नीचर, जूते, बैग और इलेक्ट्रॉनिक समान हैं। इनके रियूज करने की कोई व्यवस्था न होने के कारण लोग इसे भी कूड़े के साथ शामिल कर देते हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने योजना तो बनाई, लेकिन योजना ठीक प्रकार से धरातल पर नहीं उतर सकी। मई में जब योजना का उद्घाटन मेयर सुनील उनियाल गामा और नगर आयुक्त मनुज गोयल ने किया था तो दावा किया गया कि शहर भर में इसके लिए 50 से अधिक केंद्र खोले गए हैं। लेकिन कुछ ही दिनों में यह अभियान हवा साबित हो गया।
दून को स्वच्छता मामले में टॉप-50 लाने की कोशिश
जिन केंद्रों को खोलने की बात की गई थी, वह न तो मौके पर मिले और न ही जिनको इसकी जिम्मेदारी दी गई थी वह आम लोगों को मिले। शहरवासियों को तो छोड़िए, जिनके वार्ड में यह केंद्र खोले गए थे, उन पार्षदों को ही इसकी जानकारी नहीं मिली। ऐसे में जब हम बात दून को स्वच्छता के मामले में टॉप-50 या इससे बेहतरी स्थिति में लाने की बात कर रहे हैं तो देखना होगा कि जनसहभागिता से शुरू होने वाले अभियानों या योजनाओं को धरातल पर उतारना होगा और मजबूती के साथ उन्हें आगे भी चलाना होगा। जिससे कि स्वच्छता मामले में दून अव्वल आ सके।
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रिसाइकल, रिड्यूज और रियूज अभियान को दोबारा से शुरू किया जाएगा। जिससे कि दोबारा यूज होने वाले कूड़े से निजात मिल सके। पहले जो केंद्र खोले गए थे उनके बारे में निगम अधिकारियों से बात की जाएगी। शहर को स्वच्छता के मामले में देश के टॉप-50 शहरों में शामिल करने के लिए जो भी हो सकता है, उसको किया जाएगा। - सुनील उनियाल गामा, मेयर देहरादूनI