फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun News: पहले बीमारी और अब बारिश न होने से राजमा की फसल को नुकसान

विज्ञापन
विज्ञापन
इस बार कम होगा चकराता की प्रसिद्ध राजमा का उत्पादन
विज्ञापन


c पहले बीमारी और अब चटक धूप से राजमा सूख रही है। बारिश नहीं होने से फसल के उत्पादन पर खासा असर पड़ा है। जिससे स्थानीय किसान और खासकर महिला किसान बहुत चिंतित और निराश हैं।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में दाल की फसलों को महत्त्व दिया जाता हैं। स्थानीय किसान जरूरत के अनुसार दाल रखने के बाद पूरे साल भर का खर्च चलाने के लिए बची हुई फसल बेच देते हैं। जौनसार क्षेत्र की राजमा चकराता के नाम से शहरों में चर्चित है। लेकिन इस बार क्षेत्र में स्थानीय दालों को ग्रहण लग गया है।
विज्ञापन


पहले बीमारी से दालें अंकुरित होते ही पीली पड़ने से सूख गई थी। रही सही कसर पिछले 20 दिनों से बारिश न होने से पूरी हो गई है। पर्याप्त सिंचाई नहीं मिल पाने से फसल चिलचिलाती धूप में समय से पहले ही सूख रही है। जिससे फसल के उत्पादन पर खासा असर पड़ा है।

स्थानीय निवासी जयपाल सिंह चौहान, बलवीर सिंह राठौर, जयपाल सिंह पंवार, भीम सिंह, सुरेंद्र सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि यहां के किसान नगदी फसलों के साथ-साथ स्थानीय दालों का उत्पादन भी बहुत करते हैं। यहां के लोग पूरे साल की जरूरत के लिए दालें घरों में सुखाकर रखते हैं। जरूरत से अधिक होने पर किसान अपनी मुख्य दालों को बाजार में बेच देते हैं।
विज्ञापन



बयान...

जड़ सड़न या ऊखटा रोग मिट्टी जनित रोग है। मिट्टी तापमान से प्रभावित होती है। जैविक अभिकर्ता के उपयोग से रोग पर काबू पाया जा सकता है, लेकिन इसका प्रयोग फसल की बुवाई से पहले करना होता है। बीमारी के बीज मिट्टी में होने से रसायन का उपयोग ज्यादा कारगर नहीं होता है । कार्बेंडाजिम दवाई की 0.2 प्रतिशत के उपयोग कर भूमि की सिंचाई करने से सीमित स्तर पर नियंत्रण होगा। मिट्टी में ज्यादा जीवांश होने से बीमारी कम आती हैं। - डॉ. अशोक कुमार शर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र, ढकरानी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें