जौनसार-बावर क्षेत्र में पिछले कई दिनों से बारिश न होने के कारण नगदी फसलों पर मंडरा रहा संकट शनिवार को छंट गया। सुबह करीब सात बजे शुरू हुई रिमझिम बारिश से किसानों के चेहरों पर फिर से रौनक लौट आई है। असिंचित और पूरी तरह आसमानी बारिश पर निर्भर यहां की खेती के लिए इस वर्षा को रामबाण माना जा रहा है।लंबे समय से बारिश न होने के कारण खेतों में खड़ी अदरक, गागली, टमाटर, खीरा, हरी मिर्च, राजमा, मक्का, उड़द और मंडुवा समेत विभिन्न फसलों की बढ़वार रुक गई थी। नमी के अभाव में सूखी मिट्टी के कारण किसानों को आगामी सीजन के लिए लहसुन की बुआई की तैयारी करने में भी भारी परेशानी आ रही थी। सूखे के चलते अदरक में सड़न-गलन और तौर में उखटा रोग का प्रकोप बढ़ने से किसान चिंतित थे। इसके अलावा प्राकृतिक जलस्रोत भी सूखने की कगार पर पहुंच गए थे। शनिवार की बारिश से न सिर्फ खेतों में पर्याप्त नमी लौटी है, बल्कि जलस्रोतों के भी रिचार्ज होने की उम्मीद जगी है।स्थानीय किसान मोहर सिंह नेगी, जयपाल सिंह चौहान, बलवीर सिंह राठौर, चमन सिंह बिष्ट, भगत सिंह और भोपाल सिंह रावत ने इस बारिश को फसलों के लिए जीवनदान बताया। किसानों का कहना है कि यदि आगे भी समय-समय पर बारिश होती रही, तो नगदी फसलों का उत्पादन काफी बेहतर होगा।कृषि विज्ञान केंद्र (ढकरानी) के प्रभारी डॉ. एके शर्मा ने बताया कि बारिश से खेतों में नमी बढ़ने से खड़ी फसलों को सीधा लाभ मिलेगा। हालांकि, उन्होंने किसानों को सतर्क किया है कि अदरक व अन्य फसलों को सड़न-गलन से बचाने के लिए खेतों में जलभराव न होने दें। जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें और रोगग्रस्त पौधों के उपचार के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर कीटनाशकों या दवाओं का छिड़काव करें।