पुष्पांजलि बिल्डर्स से फ्लैट मिलने की आस में कई खरीदार मंगलवार को रेरा पहुंचे, लेकिन बिल्डर्स की तरफ से कोई हाजिर ही हुआ। जिसके चलते उन्हें मायूस ही लौटना पड़ा।
पुष्पांजलि बिल्डर्स की आर्किड पार्क और अन्य परियोजनाओं में फ्लैट खरीदारों में कोई विधवा है तो किसी ने अपनी जीवन भर की पूंजी निवेश कर दी। इन लोगों के पास कमाई का कोई साधन भी नहीं है। लेकिन, लेकिन पुष्पांजलि ग्रुप के डायरेक्टर न तो उन्हें मकान दे रहे हैं। खरीदारों ने बिल्डर पर मुकदमे दर्ज कराए गए तो वह फरार हो गया। पांच साल से 90 लोग फ्लैट के लिए लड़ाई लड़ रहे है, लेकिन बिल्डर पर कोई कानूनी शिकंजा नहीं कसा जा रहा है। भू-संपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) से भी बायर्स को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है।
मंगलवार को खरीदार रेरा में सुनवाई की तिथि पर पहुंचे, लेकिन इस बार भी पुष्पांजलि ग्रुप से कोई नहीं आया। खरीदार कविता भाटिया ने कहा, सरकारी तंत्र कठपुतली बनकर काम कर रहा है। रेरा भी अपने असीमित अधिकारों का प्रयोग नहीं कर रहा। खरीदारों ने कहा कि सरकारी तंत्र बिल्डर को बचाने में लगा है।
भगोड़े बिल्डर को संरक्षण
खरीदारों ने कहा, सरकारी तंत्र पुष्पांजलि के निदेशक दीपक मित्तल और उसकी पत्नी राखी मित्तल समेत एक अन्य निदेशक राजपाल वालिया को संरक्षण दे रहा है। नौ मुकदमे और रेरा में 61 शिकायतें दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। खरीदारों ने कहा कि सेक्शन-8 का प्रयोग कर जैसे आम्रपाली प्रोजेक्ट को एनबीसीसी के हवाले कर फ्लैटों का निर्माण पूरा कराया गया, वैसे ही पुष्पांजलि इंफ्राटेक के फ्लैैटों को किसी अन्य डेवलपर से पूरा कराया जाए।