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मसाज पार्लर के नाम पर चल रहा था सेक्स रैकेट, जस्ट डायल पर भी दिया नंबर, आगे का सच और भी घिनौना

Sat, 03 Nov 2018 06:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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मानव तस्करी दस्ते की पड़ताल में सामने आया है कि सेक्स रैकेट का धंधा मसाज पार्लर के नाम पर चल रहा था। बाकायदा जस्ट डॉयल मोबाइल फोन एप पर आयशा मसाज पार्लर दर्शाया गया था।

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रैकेट संचालिका दीपिका उर्फ अंजलि का मुख्य सहयोगी रविकांत शर्मा उर्फ आदित्य शर्मा ही डिलीवरी ब्वॉय था और तीन वर्ष पूर्व भी जिस्मफरोशी के धंधे का संचालन करने के आरोप में हरिद्वार कोतवाली पुलिस के हत्थे चढ़ा था। 

बृहस्पतिवार की देर रात मानव तस्करी दस्ते ने बहादराबाद के एक होटल से तीन लोगों को एक कॉलगर्ल के साथ पकड़ा था। इसके बाद सेक्स रैकेट के नेटवर्क का परत दर परत खुलासा हुआ था। दस्ते ने रैकेट संचालिका दीपिका उर्फ अंजलि, एक अन्य कॉलगर्ल को भी दबोच लिया था लेकिन दीपिका का मुख्य सहयोगी रविकांत उर्फ आदित्य शर्मा हाथ नहीं आ सका था।

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रविकांत को हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने पकड़ा पहले भी पकड़ा था

दस्ते ने जब पड़ताल शुरू की तब सामने आया कि मोबाइल फोन एप्लीकेशन जस्ट डॉयल पर दीपिका और रविकांत ने आयशा मसाज पार्लर दर्शाया हुआ है और अपने मोबाइल फोन उस पर रजिस्टर्ड किए हुए हैं।

ऐसे में ग्राहक सीधे इन्हें से संपर्क करते थे। फिर रविकांत ही मोलभाव होने के बाद कॉलगर्ल को ग्राहक के बताए पते पर छोड़कर आता था।

दस्ते के प्रभारी कमल मोहन भंडारी ने बताया कि पूर्व में भी रविकांत को हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने पकड़ा था। उसकी तलाश में भी पुलिस टीम जुटी है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।  
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होटल के कमरों की चाभी कब्जे में  

होटल के मैनेजर अमित शर्मा और विनोद पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। फिलहाल होटल के उन कमरों को भी पुलिस ने लॉक कर चाभी कब्जे में ले ली है ताकि यथास्थिति बनी रहे। विवेचक के उन कमरों का मुआयना करने के बाद ही कमरों की चाभी प्रबंधन को दे दी जाएगी। यह भी सामने आया है कि महज डेढ़ हजार की रकम लेकर अय्याशी के लिए कमरे उपलब्ध कराए गए थे।  

सप्ताह भर के लिए आती है कॉलगर्ल 
मानव तस्करी दस्ते के हत्थे चढ़ी दो कॉलगर्ल मूल रूप से पश्चिम बंगाल और असम से ताल्लुक रखती है। दस्ते के प्रभारी कमल मोहन भंडारी ने बताया कि कॉलगर्ल पूरे सप्ताह के लिए दिल्ली से बुलाई जाती थी। बाकायदा पूरे सप्ताह की रकम तय कर ली जाती है और खाने, ठहरने का इंतजाम रैकेट संचालक करते थे।
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