सेवाएं खत्म होने पर प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों से बाहर हुए करीब 1600 चिकित्सा कर्मचारियों को सेवा विस्तार देने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा। स्वास्थ्य सचिव डॉ. राजेश कुमार का कहना है कि पहले भी कैबिनेट से ही इन कर्मचारियों को छह महीने के लिए सेवा विस्तार दिया गया था।
बता दें कि कोरोनाकाल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगीं तो प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में करीब 1600 कर्मचारी एजेंसी के माध्यम से संविदा पर रखे गए थे। स्थितियां सामान्य हुईं तो इनकी सेवाएं खत्म कर दी गई थीं। इसके बाद इन कर्मचारियों ने कई माह आंदोलन किया। ऐसे में छह माह के लिए इनको सेवा विस्तार दिया गया था। इनमें 300 कर्मचारी अकेले दून अस्पताल में तैनात थे। 15 मार्च 2023 को फिर से इनकी सेवाएं खत्म हो गईं। इसके बाद ये कर्मचारी सेवा विस्तार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सेवाएं गड़बड़ा गई हैं।
दून अस्पताल की ओपीडी के बाहर कर्मचारियों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। इन कर्मचारियों में लैब टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय, वार्ड आया, सफाईकर्मी समेत इलेक्ट्रीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन आदि शामिल हैं। उनका कहना है कि वह स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर उनके सामने अपनी बात रखेंगे। जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में पहले से ही स्टाफ की कमी है। इसके बाद भी कर्मचारी नौकरी से निकाले जा रहे हैं। कर्मचारियों की सेवा समाप्त होने से अस्पताल के वार्डों में मुश्किल आ रही है। कर्मचारी नौकरी में सेवा विस्तार की मांग कर रहे लेकिन इनकी मांग को अस्पताल प्रशासन के साथ शासन भी नहीं सुन रहा है।
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अन्य कर्मचारी भी करेंगे कार्य बहिष्कार
उपनल कर्मचारी महासंघ, उत्तराखंड भी धरने पर बैठे कर्मचारियों के साथ आ गया है। संघ के नेताओं ने कहा कि अगर इन कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं मिलता है तो वे भी कार्य बहिष्कार कर देंगे।
मंत्री बोले- आवश्यकतानुसार समायोजित होंगे कर्मचारी
उधर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का दो टूक कहना है कि 1600 कर्मचारियों की संविदा अवधि फिलहाल नहीं बढ़ाई जाएगी। हालांकि, भविष्य में अगर कहीं जरूरत पड़ी तो इन कर्मचारियों को समायोजित जरूर किया जा सकता है।
कर्मचारी ने कोविडकाल में जान जोखिम में डालकर काम किया और अब बाहर करने से उनकी आर्थिकी पर असर पड़ रहा है। मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक से सेवा विस्तार की गुहार लगाई जा रही है। अगर मांग नहीं मानी गई तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा।
-संजय कोरंगा, अध्यक्ष, स्टेट फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर यूनियन