फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पृथ्वी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी का निदेशक और प्रबंधक गिरफ्तार, पढ़िए पूरा मामला

Fri, 15 Feb 2019 09:09 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क/अमर उजाला, बागेश्वर
विज्ञापन
गबन के आरोपी गिरफ्तार
विज्ञापन

लाखों रुपये गबन करने वाली पृथ्वी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के निदेशक को लखनऊ और प्रबंधक को बागेश्वर से गिरफ्तार कर लिया है। वहीं निदेशक की पत्नी को भी हिरासत में लिया गया है। वह भी सोसायटी में निदेशक है।

विज्ञापन


एसपी लोकेश्वर सिंह ने बृहस्पतिवार को प्रेस वार्ता में बताया कि पृथ्वी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी ने 2016 में शहर में शाखा खोली। बसंत गिरी गोस्वामी निवासी कपकोट को शाखा प्रबंधक बनाया गया। गोस्वामी ने बागेश्वर के लोगों के लाखों रुपये एक निश्चित समय के लिए निवेश कराए।

समयावधि पूरी होने के बाद जब निवेशकों ने रुपये मांगे तो बहाने बना दिये। सोसायटी ने लाखों का गबन कर दिया। 2018 से निदेशक अंडरग्राउंड हो गए। बाद में कोतवाली में सोसायटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि जांच में सोसायटी लखनऊ में पंजीकृत निकली और पति-पत्नी पीयूष अवस्थी और हिमांगी अवस्थी निदेशक थे। इधर, कोतवाली पुलिस और एसओजी की टीम ने 13 फरवरी को लखनऊ (यूपी) के कालाक्कर चौराहा ओल्ड हैदरादाबाद स्थित घर से निदेशक पीयूष अवस्थी पुत्र स्व. हरिवंश अवस्थी निवासी आनंद नगर जेल रोड लखनऊ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने सोसायटी में ही निदेशक पीयूष की पत्नी हिमांगी अवस्थी को भी हिरासत में ले लिया है हालांकि चिकित्सकीय कारणों से गिरफ्तारी नहीं की गई है। 

उधर, कोतवाली पुलिस ने बृहस्पतिवार को बागेश्वर से शाखा प्रबंधक बसंत गिरी गोस्वामी को भी गिरफ्तार कर लिया। सिंह ने बताया कि सोसायटी के अन्य सदस्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

हल्द्वानी, खटीमा, देहरादून में भी हैं शाखाएं  
पृथ्वी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी की बागेश्वर के अलावा हल्द्वानी, खटीमा, देहरादून, विकास नगर और अन्य जिलों में भी शाखाएं हैं। इन शाखाओं के जरिये जनता की गाढ़ी कमाई निवेश कराई जाती है। 
 
ऐसे देते थे ठगी को अंजाम 
सोसायटी के निदेशक, अधिकारी, कर्मी अशिक्षित, गरीब, बेरोजगारों को कम समय में रकम दोगुनी करने का झांसा देते थे। इस बाबत उनका सोसायटी में खाता खुलवाया जाता और रकम जमा कराई जाती। बाद में बैंक खातों के जरिये जमा रकम को लखनऊ ट्रांसफर कर दिया जाता था। वहां से रकम का गबन हो जाता था। अभी तक बागेश्वर के 85 खातों से 20 लाख रुपये से अधिक की रकम का गबन सामने आया है। वहीं अन्य राज्यों की शाखाओं का गबन मिलाकर घोटाला करोड़ों तक पहुंच सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें