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I- उल्लंघन किया तो वापस आने पर लगेगी किसी भी प्रकार की छुट्टी पर रोकI
जेल से पैरोल या किसी अन्य प्रकार की छुट्टी पर जाने वाले कैदी अब जेल प्रशासन की आंख में धूल नहीं झोंक सकेंगे। अब उन्हें जेल से बाहर जाने से पहले ही एक जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस पहनाया जाएगा। कलाई पर ब्रेसलेट के रूप में पहने जाने वाले इस उपकरण से उनकी लोकेशन का वास्तविक पता चल सकेगा। यह व्यवस्था नए जेल एक्ट में की जा रही है। कैदी अगर इस ब्रेसलेट को खोलेंगे या फिर बताए स्थान से कहीं और जाएंगे तो इसका पता जेल प्रशासन को चल जाएगा। यही नहीं अगर कैदियों ने इसका उल्लंघन किया तो उनकी अगली छुट्टी पर भी रोक लग सकती है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने अंग्रेजी शासनकाल से चले आ रहे कारागार अधिनियम 194 की समीक्षा की थी। इसके बाद इसमें संशोधन का निर्णय लिया था। संशोधन की जिम्मेदारी ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) को सौंपी गई थी। इसके बाद बीपीआरएंडडी ने जेल प्राधिकरणों और सुधार विशेषज्ञों से विचार विमर्श करते हुए मॉडल कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं अधिनियम 2023 का ड्राफ्ट तैयार किया। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपेक्षा की थी कि वे सब इस ड्राफ्ट को अपनाएं। साथ ही मौजूदा कारागार अधिनियम 1894, बंदी अधिनियम 1900 और बंदी अंतरण अधिनियम 1950 को रद्द करें।
इसी के क्रम में उत्तराखंड गृह विभाग ने भी इस ड्राफ्ट में अपने सुझावों को शामिल करते हुए एक्ट तैयार किया है। इसे बिल के रूप में विधानसभा में रखा गया जो शुक्रवार को पारित किया जा चुका है। जल्द ही राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह कानून का रूप लेगा। इस एक्ट का नाम उत्तराखंड कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं अधिनियम 2024 होगा। इसमें जेल प्रशासन, कैदियों और अन्य व्यवस्थाओं में पहले के कानूनों से अलग व्यवस्था की गई है।
इसी में विधेयक के खंड 29 में कैदियों पर इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस के प्रयोग का भी प्रस्ताव दिया गया है। इसमें व्याख्या की गई है कि यदि कैदी किसी भी प्रकार की छुट्टी जाता है तो इच्छा के अनुरूप उस पर जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस एंकल यानी कलाई ब्रेसलेट के रूप में बांधा जा सकेगा। इससे उनकी लोकेशन ट्रैक होगी। उल्लंघन करने पर संबंधित छुट्टी या पैरोल और आगामी छुट्टियां तक रद्द की जा सकती हैं।
Iजेल अपराध करने पर मिलेगी कई तरह की सजाएंI
विधेयक के खंड 39 में जेल अपराध की व्याख्या की गई है। कुल 24 तरह के कृत्यों को जेल अपराध में शामिल किया गया है। इनमें कठोर कारावास वाले कैदी अगर काम के लिए मना करते हैं तो यह भी जेल अपराध है। इसके अलावा दूसरों से काम कराना, जेल के सामान को तोड़ना, सामूहिक भूख हड़ताल में शामिल होना, कारागार से बाहर किसी व्यक्ति से बात करना, अधिकारी पर झूठा आरोप लगाना आदि अपराध शामिल हैं। इनके लिए पांच तरह की सजाओं का प्रावधान किया गया है। ये सजाएं उन्हीं अपराधों में मिलेंगी जो भारतीय न्याय संहिता या किसी विशेष कानून की परिधि में नहीं आते हैं। मसलन मारपीट, हत्या जैसे अपराधों में सजाएं भारतीय न्याय संहिता के अनुसार होंगी।