पछवादून की जलविद्युत परियोजनाओं को पानी की आपूर्ति देने वाली शक्तिनहर के जर्जर पुलों को ठीक करने की कवायद जलविद्युत निगम ने शुरू कर दी है। इससे क्षेत्र के निवासियों को पुल बंद होने से प्रभावित हुए यातायात के सुचारू होने की उम्मीद जग गई है। बिजली उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण पछवादून की ढकरानी, ढालीपुर व कुल्हाल जलविद्युत परियोजनाओं को पानी की आपूर्ति देने के लिए 1960 से 1965 के बीच शक्तिनहर का निर्माण कराया गया था। डाकपत्थर बैराज से लेकर आसन बैराज तक और आसन बैराज से लेकर कुल्हाल तक बनाई गई इस 13 किलोमीटर लंबी नहर पर पैदल चलने के लिए चार छोटे पुल, भारी व सभी प्रकार के यातायात के लिए 12 बड़े पुलों का निर्माण कराया गया था। अब सभी कमजोर होने लगे थे। जल विद्युत निगम के माध्यम से समय-समय पर कराई गई तकनीकी जांच में आईआईटी रुड़की व केंद्रीय संस्था सीएसआईआर पुलों की स्थिति को खतरनाक बता चुके हैं। इसी क्रम में जनवरी माह में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जर्जर पुलों से होने वाली भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी। संवाद