लॉकडाउन के चलते एक गर्भवती महिला को हुई दिक्कत का कुछ समाजसेवियों की मदद से उपचार किया जा सका। जिसके बाद डॉक्टरों की देखरेख में उसकी डिलीवरी भी हो गयी। राजकीय गांधी शताब्दी अस्पताल में परिजनों के साथ पंहुची गर्भवती महिला को पहले डाक्टरों ने गर्भस्थ शिशु कमजोर बताया और फिर अल्ट्रासाउंड बाहर से करवाने को कहा।
कुछ समाजसेवियों ने प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक से शिकायत की तो उन्होंने इस पर हस्तक्षेप किया। चमोली के गौचर के एक गांव की इस महिला को शुक्रवार सुबह प्रसव पीड़ा हुई। 108 सेवा की एंबुलेंस से परिजन महिला को गांधी शताब्दी अस्पताल लेकर पहुंचे। डाक्टर ने बताया कि सामान्य डिलीवरी नहीं होगी और हायर सेंटर रेफर करना होगा।
कई देर तक अनुरोध के बाद एक डाक्टर ने कहा कि बाहर से अल्ट्रासाउंड कराकर ले आओ, फिर देखेंगे। पैसे न होने पर वह बाहर ही बेंच पर बैठे रहे। इसी बीच समाजसेवी विजय जुयाल और गुणानंद जखमोला ने उनकी मदद की। उन्होंने इसकी सूचना प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. बीसी रमोला को दी। डा. रमोला ने महिला चिकित्सक डा. पदमा रावत को मौके पर भेजा। जिसके बाद उन्होंने करीब एक बजे आरती को ऑपरेशन थियेटर में भर्ती किया और सिजेरियन डिलीवरी के बाद बच्ची को जन्म दिया। मनीष भट्ट