विकासखंड के मेहरावना गांव में पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से 600 से अधिक लोग पानी संकट से जूझ रहे हैं। प्लास्टिक के पाइप लाइन के माध्यम से लोग किसी तरह गांव में पीने लायक पानी पहुंचा रहे हैं। पशुओं को पानी पिलाने के लिए दूर दराज के खड्ड में ले जाना पड़ता है। ऐसी ही स्थिति क्षेत्र के करीब डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में है। दशकों पूर्व बनी पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त होने से करीब दस हजार की आबादी परेशान है।
मेहरावना गांव में करीब 50 परिवार निवास करती हैं। गांव की आबादी करीब 600 है। लाइन दशकों पुरानी और जर्जर है। जिस कारण गांव तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में ग्रामीण वैकल्पिक स्रोत के जरिए प्लास्टिक के पाइपों के सहारे गांव तक पानी पहुंचा रहे हैं। जिससे लोगों को पीने लायक ही पानी मिल पा रहा है। इसकी वजह से रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
मेहरावना की प्रधान शर्मिला देवी, टुंगरा के प्रधान प्रभु भारती, ठाणा की प्रधान सिमरन जोशी और बिरमोऊ के प्रधान दिनेश कुमार का कहना है कि दशकों पूर्व बनी योजनाएं तब की आबादी के हिसाब से बनाई गई थी। वर्तमान में आबादी कई गुणा बढ़ चुकी है। देखरेख के अभाव में योजनाएं जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी हैं। अक्सर बारिश के दिनों में लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती है। गर्मियों में जल स्तर कम होने के कारण गांव तक पानी नहीं पहुंच पाता।
10 हजार की आबादी प्रभावित
दशकों पूर्व सिजला खड्ड-पुरोड़ी छटऊ तोक पेयजल योजना, जाड़ी-खमरोली पेयजल योजना, जाड़ी-डांडी पेयजल योजना, जाड़ी-छावनी बाजार चकराता पेयजल योजना, मेहरावना पेयजल योजना का निर्माण कराया गया था। इन योजनाओं से खमरोली, डांडा, मेहरावना, ठाणा, टुंगरा, रिखाड़, बिरमोऊ, लांघा पोखरी, पुरोड़ी, रामताल गार्डन, माख्टी, पोखरी, छटऊ, छावनी बाजार, सप्लाई, एमईएस लाइन, लालकुर्ती आदि की करीब 10 हजार की आबादी जुड़ी है। देखरेख के अभाव में योजनाएं जर्जर हाल में पहुंच चुकी हैं। जिस कारण इन योजनाओं से जुड़े गांवों में अक्सर पेयजल की समस्या बनी रहती है। गर्मियों में पानी का संकट और भी गहरा जाता है। तब लोगों को प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोना पड़ता है। कई बार ग्रामीणों को श्रमदान कर लाइनें ठीक करनी पड़ती हैं। ग्रामीण लंबे समय से योजनाओं के जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं।
बयान...
योजनाओं की देखरेख की जिम्मेदारी ठेकेदारों की है। जिस भी योजना में समस्या आती है, उसको तत्काल ठीक कराया जाएगा। योजनाओं के जीर्णोद्धार के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। - राजेंद्र पाल सिंह, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान