लाई डिटेक्टर या पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रक्रिया के लिए पुलिस पहले संबंधित व्यक्ति की सहमति लेती है। इसके बाद जिस व्यक्ति का पॉलीग्राफ टेस्ट होना होता है उसे न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाता है। कोर्ट में उसका बयान दर्ज किया जाता है। अगर संबंधित व्यक्ति पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए हां करता है तो कोर्ट इसकी अनुमति दे देता है।
सीबीआई से टेस्ट के लिए करना पड़ता है अनुरोध
पॉलीग्राफ टेस्ट की सुविधा सीबीआई के पास है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस सीबीआई से पॉलीग्राफ टेस्ट का अनुरोध करती है। इसके बाद सीबीआई की दिल्ली स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री के वैज्ञानिक टेस्ट के लिए तारीख तय करते हैं।
दो युवतियों और एक युवक को कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट ने बयान के आधार पर पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का आदेश दे दिया है। अब टेस्ट के लिए अनुमति ली जाएगी।
-जन्मेजय खंडूरी, एसएसपी, नैनीताल
विधि विज्ञान प्रयोगशाला रुद्रपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. दयाल शरण के मुताबिक पॉलीग्राफ टेस्ट चार बिंदुओं पर होता है। इसमें हृदय गति, श्वसन गति और पसीने की जांच की जाती है। जिस व्यक्ति का टेस्ट होता है उसके हाथ, अंगुली, हृदय व श्वसन जांच के लिए मशीन लगाई जाती है। यह मशीन कंप्यूटर से लिंक रहती है।
20 सवालों का देना होता है जवाब
पॉलीग्राफ टेस्ट से सीबीआई के वैज्ञानिक केस से जुड़े पुलिस के जांच अधिकारी से केस की पूरी ब्रीफ लेते हैं। इसके आधार पर 20 प्रश्न तैयार किए जाते हैं। पहले तीन सवाल सामान्य होते हैं। चौथा सवाल केस संबंधित होता है। इसमें पॉलीग्राफ टेस्ट देने वाले व्यक्ति को हां या ना में ही जवाब देना होता है।
हाल में 17 का हुआ था पॉलीग्राफ टेस्ट
13 नवंबर को ऊधमसिंह नगर में सीबीआई की टीम ने 17 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया था। जसपुर थाना क्षेत्र में एक हत्या व एक अन्य मामले में पुलिस ने कोर्ट से जांच की अनुमति ली थी। सीबीआई की टीम ने इनका पॉलीग्राफ टेस्ट किया था।