कोरोना वायरस के खौफ के बीच सुकून देने वाले भी खबरें आ रही हैं । केंद्र व राज्य सरकार की ओर से लागू किए गए लॉकडाउन के चलते राजधानी की आबोहवा बेहद शुद्ध हो गई है ।
गाड़ियों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगाए जाने से जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स का आंकड़ा 54 के आसपास पहुंच गया है , वहीं पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा में भी अप्रत्याशित कमी हुई है।
आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो वर्तमान में एयर क्वालिटी इंडेक्स 54 है, पीएम 2.5 का लेबल 15.5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर पहुंच गया है । जहां तक पीएम 10 का सवाल है तो पीएम 10 भी 69.5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर नीचे आ गया है ।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों की मानें तो वातावरण में पीएम 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए। वहीं पीएम10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक हो सकती है । जबकि आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो वर्तमान में पीएम 2.5 और पीएम 10 का आंकड़ा काफी नीचे आ चुका है।
प्रदूषण विज्ञानी डॉ. अनूप नौटियाल का कहना है कि लॉकडाउन के चलते गाड़ियों का संचालन पूरी तरह से ठप होने और लोगों की आवाजाही पर रोक लगाए जाने से प्रदूषण का स्तर बहुत नीचे आ गया है जो सुकून देने वाली बात है ।जबकि आम दिनों में अप्रैल-मई माह में पीएम 10 का आंकड़ा 70 के ऊपर पहुंच जाता है, पीएम 2.5 का आंकड़ा डेढ़ सौ दो सौ के आसपास पहुंचता है ।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्टेशनों से नहीं हो रही मॉनिटरिंग
सरकार की ओर से लॉकडाउन लागू किए जाने के बाद से उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से घंटाघर, राजपुर , आईएसबीटी ,ऋषिकेश जैसे स्थानों पर लगाए गए मॉनिटरिंग स्टेशनों से प्रदूषण की निगरानी नहीं हो पा रही है। क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल का कहना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की आवाजाही पर रोक लगाए जाने की वजह से मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है।