पुलिस स्मृति दिवस पर रविवार को आयोजित रैतिक परेड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद पुलिसकर्मियों को याद कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक स्थिति अन्य राज्यों से बहुत भिन्न है। लिहाजा यहां की पुलिस के सामने भी उसी तरह से कठिन चुनौतियां हैं।
इस दौरान मुख्यमंत्री प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण कोई घोषणा नहीं कर पाए। हालांकि, उन्होंने सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को न्यायालय जाने के लिए यात्रा भत्ता संबंधित शासनादेश की जानकारी जरूर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह यात्रा भत्ता न्यायालय से नहीं बल्कि पुलिस महकमे की ओर से ही दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पुलिस कम संसाधनों के बावजूद विषम परिस्थितियों में अपनी क्षमता का लोहा मनवा रही है। आने वाले आने वाले वर्षों में उत्तराखंड पुलिस को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना है, लेकिन उन्हें आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि उत्तराखंड पुलिस अपनी उपलब्ध जनशक्ति एवं संसाधनों से इन सब चुनौतियों का सामना करने में सफल होगी।
इस मौके पर पुलिस महानिदेशक अनिल के रतूड़ी ने इस साल भारत में शहीद हुए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के शहीद पुलिसकर्मियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उत्तराखंड में के दो वीर सपूतों कांस्टेबल रमेश लाल, आईआरबी द्वितीय, कांस्टेबल सुभाष कुमार, जनपद पौड़ी गढ़वाल ने ड्यूटी करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है। परेड का नेतृत्व एसपी लोकेश्वर सिंह ने किया। कार्यक्रम में टिहरी सांसद मालाराज्य लक्ष्मी शाह, रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत, अरविंद पांडेय, धन सिंह रावत, विधायक उमेश शर्मा काऊ, खजान दास, हरवंश कपूर, गणेश जोशी, विनोद चमोली, देशराज, केदार सिंह रावत, मुन्ना सिंह चौहान, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक कार्मिक रामसिंह मीणा, अपर पुलिस महानिदेशक अभिसूचना वी विनय कुमार आईजी दीपम सेठ आदि उपस्थित रहे।
पुलिस स्मृति दिवस
21 अक्तूबर 1959 को भारत की उत्तरी सीमा पर लद्दाख के 15 हजार फुट ऊंचे बर्फीले दुर्गम क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की गश्ती टुकड़ी के 10 जवान चीन के अतिक्रमणकारियों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। इन्हीं वीर सपूतों के बलिदान की स्मृति में हर वर्ष 21 अक्तूबर को देशभर में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
अब तक न्यायालय से मिलता था भत्ता
सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व में की गई विवेचनाओं के चलते अधिकारी न्यायालय में प्रस्तुत होते हैं। ऐसे में उन्हें यात्रा भत्ता देने की व्यवस्था न्यायालय से ही होती थी, लेकिन अब पिछले दिनों शासनादेश में अब इस यात्रा भत्ता विभाग से ही दिलाने की व्यवस्था की है। रविवार को मुख्यमंत्री ने इस शासनादेश की जानकारी दी।
तीन शहीदों के परिजन सम्मानित
1-मधु राणा पत्नी शहीद उपनिरीक्षक रामसिंह राणा, बीएसएफ
2-बुद्धिमति देवी माता शहीद रेडियो ऑपरेटर जगदीश चंद, बीएसएफ
3-पूजा पत्नी शहीद कांस्टेबल सुभाष कुमार, उत्तराखंड पुलिस