खुद पुलिसकर्मी कह रहे हैं कि उन्होंने बदमाशों को जाते हुए देखा है। ऐसे में सवाल उठता है कि चौराहे पर ड्यूटी बजा रहे पुलिसकर्मियों ने जब बदमाशों को भागते देखा तो खुद उनका पीछा क्यों नहीं किया ? पुलिसकर्मियों ने कंट्रोल रूम को भी इसकी सूचना देने की जहमत तक नहीं उठाई ?
बता दें कि सात बदमाशों ने मेरठ के सराफा कारोबारियों से 15 लाख रुपये के जेवर लूट लिए थे। घटना के बाद करीब तीन घंटे तो पुलिस ने इसकी जानकारी जुटाने में ही गुजार दिए। इसके बाद जांच शुरू की तो पता चला कि एक संदिग्ध की फुटेज सामने आई है।
उस संदिग्ध को कारोबारियों ने भी काफी हद तक पहचान लिया है। पूरे मामले में पुलिस रात तक केवल धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने के अलावा कुछ नहीं कर पाई थी। बुधवार सुबह पुलिस को कुछ और फुटेज हाथ लगी है, जिनमें दो संदिग्ध एक साथ दिखाई दे रहे हैं।
एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि पुलिस की कुछ टीमों को मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर और बागपत जनपदों में भेजा गया है। पता चला है कि इस तरह की घटनाओं को पश्चिमी यूपी में कई बार अंजाम दिया जा चुका है।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बताया कि बदमाश दिल्ली नंबर की एक मोटरसाइकिल से फरार हुए हैं। हालांकि, पुलिस को शक है यह नंबर प्लेट फर्जी हो सकती है। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि बदमाश चकराता रोड से होते भागे हैं। लिहाजा वहां की दुकानों और प्रतिष्ठानों के सामने लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि अभी तक पुलिस के हाथ दो फुटेज के अलावा कुछ नहीं लगा है।
घटना के संबंध में मंगलवार रात एक स्कॉर्पियो की सूचना भी पुलिस को मिली थी। बताया गया था कि बदमाश इस स्कार्पियो से फरार हुए हैं। उसके बाद पुलिस ने रातोंरात देहरादून से बाहर निकलने वाले रास्तों पर चेकिंग बढ़ाई। एसएसपी ने बताया कि इस सूचना के बाद भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा है।