नर्सरियों को मनमाने तरीके से लाभ पहुंचाया
इस बार कीवी के पौधों के दाम 75 से 225 रुपये कर दिए गए। जबकि, कलम वाले कीवी के पौधों के दामों को 175 रुपये से बढ़ाकर 275 रुपये कर दिया गया। जांच में सामने आया कि ये दाम पड़ोसी राज्यों हिमाचल और जम्मू कश्मीर से कई गुना अधिक हैं। ऐसा इसलिए किया गया कि नर्सरियों को मनमाने तरीके से लाभ पहुंचाया जा सके। इसका बड़ा हिस्सा इन अधिकारियों की जेब में भी आया।
इसी तरह सेब के पौधों की दर 480 रुपये फिक्स कर दी गई। यह दर भी दोनों राज्यों से कहीं अधिक थी। जब इस बात पर सवाल उठे तो पूर्व निदेशक ने अपने चहेते अधिकारियों से ही इसकी जांच कराई, जिसमें कोई निर्णय नहीं आया। सेब के पौधों के लिए पाल नर्सरी नाम की फर्म ने 300 रुपये प्रति पौधा की दर प्रस्तावित की थी। लेकिन, पूर्व निदेशक और उनके चहेते अधिकारियों ने मनमर्जी से सेब के पौधे जम्मू कश्मीर की बरकत एग्रो से 465 रुपये प्रति पौधे की दर से खरीदे गए। इस फर्म से कुल 183625 सेब के क्लोन रूट पौधे खरीदे गए, जिसके लिए उसे 8.53 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
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150 के पौधे को 465 में खरीदा
सेब के उन पौधों को खरीदने में भी तमाम अनियमितताएं हुई जिनकी गुणवत्ता ठीक नहीं थी। इन पौधों पर फेदर नहीं था उनकी दर 150 रुपये निर्धारित की गई थी। यह दर उद्यान निदेशालय ने ही ऐसे पौधों के लिए निर्धारित की थी। जबकि, पूर्व निदेशक के इशारे पर बरकत एग्रो से 2.55 करोड़ रुपये में 1.09 लाख रुपये ऐसे पौधे खरीदे गए। इनकी दर करीब तीन गुना 465 रुपये चुकाई गई। यही नहीं इस जैसी कई फर्म को नियमों को ताक पर रखकर भुगतान भी किया गया।I