वन विभाग की ओर से आयोजित वन्यजीव सप्ताह के दूसरे दिन दून चिड़ियाघर में जहां पर्यटकों और बच्चों के लिए रॉक पाइथन, बर्मीज पाइथन जैसे खतरनाक अजगरों को दिखाने के साथ ही उनके बारे में जानकारी दी गई, वहीं रसेल वाइपर, इंडियन कोबरा, वाइन स्नेक, करैत जैसे जहरीले सांपों को देखकर सहम गए। लोग वन्यजीवों के प्रति बेहद संवेदनशील हों, इसके लिए चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से जागरूकता रैली निकाली गई। इस मौके पर दून चिड़ियाघर के निदेशक व प्रभागीय वनाधिकारी नीतीशमणि त्रिपाठी, वन क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप मिश्रा, उपवन क्षेत्राधिकारी विनोद लिंगवाल, वन दरोगा चरण सिंह, आशा चौहान, प्रियंका मेघवाल, मनोज चमोली, अमित असवाल आदि मौजूद थे।वन्यजीव सप्ताह के दौरान स्कूली बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।
वन विभाग की ओर से आयोजित वन्यजीव सप्ताह के दूसरे दिन दून चिड़ियाघर में जहां पर्यटकों और बच्चों के लिए रॉक पाइथन, बर्मीज पाइथन जैसे खतरनाक अजगरों को दिखाने के साथ ही उनके बारे में जानकारी दी गई, वहीं रसेल वाइपर, इंडियन कोबरा, वाइन स्नेक, करैत जैसे जहरीले सांपों को देखकर सहम गए। चिड़ियाघर के विशेषज्ञों ने सभी को इन खतरनाक सांपों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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सरीसृप विशेषज्ञों ने पर्यटकों को सांपों के रहन-सहन व उनके स्वभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लोग वन्यजीवों के प्रति बेहद संवेदनशील हों, इसके लिए चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से जागरूकता रैली निकाली गई। चिड़ियाघर के क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत की अगुवाई में निकाली गई रैली के दौरान वन्यजीवों को संरक्षित करने और उनके प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने के लिए जागरूक किया गया। इस मौके पर दून चिड़ियाघर के निदेशक व प्रभागीय वनाधिकारी नीतीशमणि त्रिपाठी, वन क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप मिश्रा, उपवन क्षेत्राधिकारी विनोद लिंगवाल, वन दरोगा चरण सिंह, आशा चौहान, प्रियंका मेघवाल, मनोज चमोली, अमित असवाल आदि मौजूद थे।
वन्यजीव सप्ताह के दौरान स्कूली बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इस दौरान केंद्रीय विद्यालय अपर कैंप, राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मालसी, राजकीय इंटर कॉलेज गुनियाल गांव, राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय किशनपुर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय गल्जवाड़ी के छात्र-छात्राओं ने चित्रकला से वन्यजीवों के संरक्षण का संदेश दिया। चित्रकला प्रतियोगिता में कक्षा चार से लेकर 12वीं तक के बच्चे शामिल हुए। बच्चों के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 50 से अधिक बच्चों ने भाग लिया।