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I-फुटकर के अभाव में मरीजों के पर्चे के पीछे लिख दी जाती है शेष धनराशिI
बदलते दौर के साथ ई-भुगतान का प्रचलन बढ़ा है। खरीदारी और बिलों के भुगतान के लिए लोग ई-भुगतान एप का प्रयोग करते हैं। लेकिन, उप जिला अस्पताल में पर्चा और जांच शुल्क के काउंटर पर इसकी सुविधा नहीं है। कई मरीज ई-भुगतान के लिए कहते है तो उनको सुविधा न होने का हवाला दिया जाता है।
उप जिला अस्पताल विकासनगर की ओपीडी में रोजाना करीब 500 मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में पर्चा और जांच शुल्क के लिए मरीजों को नकद भुगतान करना पड़ता है। ओपीडी के पर्चे का शुल्क 27 रुपये होता है। मसलन मरीज अगर 50 रुपये का भुगतान करते हैं तो उनको 20 रुपये वापस कर दिए जाते हैं। शेष तीन रुपये की धनराशि को बाद में वापस करने की बात कहकर पर्चे के पीछे लिख दिया जाता है। अब मरीजों को शेष धनराशि को वापस लेने के लिए फिर से लाइन लगानी पड़ती है। वहीं, कुछ मरीज ऐसे होते हैं, जो रुपये लेना भूल जाते हैं, या लाइन में दोबारा लगने की वजह से पैसे छोड़ देते हैं। ऐसे में मरीजों को तीन रुपये का नुकसान होता है।
Iसभी जगह ई-भुगतान की सुविधा है। अब जेब में सिक्के कम ही रहते हैं। अस्पताल के पर्चा काउंटर पर क्यूआर कोड नहीं लगा है। पर्चा बनवाया था उसके पीछे तीन रुपये शेष वापसी का लिखा गया है। अब रुपये लेने के लिए दोबारा लाइन में कौन लगेगा।
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Iकुलदीप, मरीज
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Iआज सभी लोग मोबाइल के माध्यम से भुगतान करते हैं। सब्जी और राशन की दुकानों तक क्यूआर कोड लगे होते हैं। अस्पताल में ई-भुगतान की सुविधा नहीं है। पर्चा बनवाया था अब शेष धनराशि लेने के लिए लाइन में खड़े हैं।
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Iरोहित, मरीजI