जौनसार बावर क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों से मामूली मर्ज के मरीज भी रेफर कर उप जिला अस्पताल भेजे जा रहे हैं। हैरानी की बात है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रोग से संबंधित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। इससे दो बेंच के सहारे चले रहे उप जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों के उपचार में दिक्कत आ रही है। वहीं मरीजों का समय और पैसे बर्बाद हो रहे हैं।
उप जिला अस्पताल की ओपीडी लगातार बढ़ रही है। सोमवार और शनिवार को अस्पताल की ओपीडी करीब 600 से 650 तक पहुंच जाती है। हालांकि मरीजों के भारी दबाव के बावजूद ओपीडी संचलित की जा रही है। लेकिन अब इमरजेंसी में उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा होने लगा है। करीब 45 से 50 मरीज इमरजेंसी में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से छह से आठ मरीज गंभीर होते हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन के लिए मुसीबत यह है कि आठ से 10 मामूली मर्ज के मरीज भी रेफर होकर पहुंच रहे हैं।
यह मरीज सीएचसी चकराता, साहिया, पीएचसी कालसी, त्यूणी से रेफर होकर आते है। वहीं हिमाचल प्रदेश और सहारनपुर के सीमावर्ती क्षेत्र से भी मरीजों को यहां भेजा जाता है। इनमें सामान्य उल्टी, दस्त, बुखार, चोट, पेट और छाती से जुड़ी सामान्य समस्या के मरीज शामिल होते हैं। मरीज इमरजेंसी में आता है और कुछ देर के उपचार के बाद स्वस्थ हो जाता है।
चिकित्सक मरीज को वापस भेजते हैं तो तीमारदार हालत गंभीर होने का हवाला देकर उसको भर्ती करने के लिए कहते हैं। हालांकि मरीजों को भर्ती करने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन तीमारदारों को लगता है मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। ऐसे में कई बार तीमारदार चिकित्सकों से बहस भी करते हैं। जौनसार बावर क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों से मरीजों के रेफर होने को लेकर स्थानीय लोग भी लगातार सवाल उठाते आ रहे हैं।
Iरोग से संबंधित चिकित्सक या सुविधा न होने पर मरीज हायर सेंटर रेफर किए जाते हैं। उप जिला अस्पताल में रेफर होकर आने वाले कुछ मरीजों को मामूली स्वास्थ्य समस्या या चोटें लगी होती है। कई बार इन मरीजों के उपचार की प्रकिया के चलते गंभीर रोग वाले मरीजों के उपचार में भी समस्या होती है। वहीं रेफर होकर आए मरीजों और उनके तीमारदारों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। - डॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, उप जिला अस्पतालI