माई सिटी रिपोर्टर देहरादून। लॉकडाउन अवधि की फीस माफ करने समेत चार बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग को लेकर उत्तराखंड समेत 12 राज्यों के अभिभावकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है। अभिभावकों ने प्राइवेट स्कूलों की ओर से फीस के लिए बनाए जा रहे दबाव का जिक्र करते हुए इसमें राहत देने की मांग की है। अभिभावकों ने राष्ट्रपति के साथ ही सभी राज्यों के राज्यपाल और शिक्षा मंत्रियों को भी पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरंट्स एंड स्टूडेंट राइट्स के अध्यक्ष आरिफ खान ने बताया कि अभिभावकों ने लॉकडाउन अवधि की फीस माफ करने, ऑनलाइन क्लास मोबाइल लैपटॉप के बजाय टीवी के माध्यम से कराने, सभी स्कूलों में एनसीईआरटी किताबें पाठ्यक्रम में अनिवार्य रुप से लागू करने और कोविड-19 वैक्सीन आने तक स्कूलों को बंद रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि जो प्राइवेट स्कूल फीस जमा ना होने पर अपने स्टाफ को वेतन देने में असमर्थता जता रहे हैं, उनके पिछले पांच साल के आय-व्यय की जांच कराई जानी चाहिए। अभिभावकों ने कहा कि केंद्रीय स्तर पर जो शिक्षा की नई नीति बनाई जा रही है, उसके अनुसार पाठ्यक्रम में 30 फ़ीसदी की कमी की जानी है। लेकिन कई निजी प्राइवेट स्कूल संचालक अपने स्वार्थ के लिए अभिभावकों पर जबरन किताबें थोप रहे हैं। आलम यह है कि पहली कक्षा के बच्चों की किताबें साढ़े आठ हजार रुपये तक की पड़ रही है। उन्होंने कहा कि अभी कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आए दिन कोरोना से किसी के संक्रमित होने और मौत की खबरें आ रही हैं।ऐसे में स्कूलों को खोलकर बच्चों को खतरे में नहीं डाला जा सकता। उन्होंने कहा कि वैक्सीन की खोज होने या कोरोना के मामले खत्म होने तक स्कूल नहीं खोली जाने चाहिए।