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Iउत्तरांचल उत्थान परिषद की ओर से विचार गोष्ठी का आयोजनI
हिमालय दिवस की पूर्व संध्या पर उत्तरांचल उत्थान परिषद की ओर से हिमालय एक चिंतन व समाधान विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी ने कहा कि हिमालय केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि संपूर्ण देश और विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र है। इसलिए इसके संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। इस दौरान उन्होंने हिमालय की समृद्धि और सुरक्षा के लिए प्रतिज्ञा कराई।
देहरादून स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिमालय क्षेत्र के पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर गहन चर्चा और समाधान के उपायों पर ध्यान केंद्रित करना था। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण ने कहा कि हिमालय की समृद्धि और सुरक्षा का सीधा संबंध न केवल हमारे पर्यावरण से है, बल्कि हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से भी है। यह पर्वत श्रृंखला हमें जीवनदायिनी जल, स्वच्छ वायु और प्राकृतिक संसाधनों की आपूर्ति करती है। उन्होंने हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, वनस्पति क्षति और पारिस्थितिकी असंतुलन के प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। विशिष्ट अतिथि पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने हिमालय का धार्मिक साहित्य व कालिदास के कुमारसम्भव में वर्णन का उल्लेख किया। विषय विशेषज्ञों में गढ़वाल विवि के भूगोल विभाग के अध्यक्ष डा. मोहन पंवार ने कहा कि हिमालय नवीन पर्वत श्रृंखला है, जिसमें अभी शोध अनुसंधान की आवश्यकता है। दून विवि की कुलपति सुरेखा डंगवाल ने कहा कि हिमालय को समझने के लिए हमें सामान्य ग्रामीण महिलाओं से सीखने की आवश्कता है। कर्नल अजय कोठियाल ने कहा कि आपदा के समय स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर आपदा प्रबंधन के कार्य में लगाया जा सकता है। यूसर्क के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. भावतेश शर्मा ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में प्रेम बडा़कोटी, धनंजय, नीरज मित्तल, आनंद सिंह रावत, नरेश कुलाश्री, डीएन उनियाल, विपुल जोशी आदि मौजूद रहे।