एक ओर जहां एमडीडीए ने मलिन बस्तियों में अवैध कब्जे हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर विभिन्न संगठन इसके विरोध में आ गए हैं। शनिवार को जनसंगठनों एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने उपजिलाधिकारी शालिनी नेगी को सीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
संगठनों आरोप लगाया कि गरीबों को गैर कानूनी तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही गरीब लोगों के आशियाने न उखाड़ने, बस्तियों के नियमितीकरण, फुटपाथ व्यवसायियों का उत्पीड़न रोकने एवं वेंडिंग जोन घोषित करने सहित अन्य मांगें उठाईं। ज्ञापन में कहा कि अतिक्रमण अभियान या फिर एनजीटी के फैसले के तहत किसी भी बड़े बिल्डर, होटल या सरकारी विभाग पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, केवल गरीब बस्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। अतिक्रमण अभियान के दौरान बेदखली के लिए कानूनी प्रक्रिया भी नहीं अपनाई जा रही है। कहा कि पीड़ितों को व्यक्तिगत सुनवाई और अपील करने का कोई मौका नहीं दिया जा रहा है।
प्रभावित लोगों में एससी समाज के भी शामिल हैं, जिन्हें बिना कानूनी कार्रवाई के बेदखल करना अपराध है। ज्ञापन देने वालों में सीपीएम सचिव अनंत आकाश, सीआईटीयू महामंत्री लेखराज, नवनीत गुंसाई, बस्ती बचाओ अभियान के नरेंद्र सिंह, राजेंद्र शर्मा, भीम आर्मी के आजम खान, प्रभात डंडरियाल, रघुबीर सिंह, डिंपल, रेणु, ममता, सुनैना, मनीषा, मंजू, रीना, पिंकी, प्रेमफूल, संगीता, सोनी, विनोद, हरिओम, सोनू आदि मौजूद रहे।