पानी सप्लाई, लीकेज समेत कोई भी समस्या होने पर सॉफ्टवेयर से कंट्रोल रूम को मिलेगी जानकारी, ट्रायल शुरू
अब राजधानी दून में जल आपूर्ति तंत्र स्मार्ट सिटी की स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्यूजीशन) परियोजना के कंट्रोल रूम से संचालित होगा। स्काडा एक स्वचालित प्रणाली है, जिसमें सॉफ्टवेयर के माध्यम से जल आपूर्ति नियंत्रित की जाएगी। क्षेत्र में पानी सप्लाई, लीकेज समेत कोई भी समस्या होने पर सॉफ्टवेयर से तत्काल कंट्रोल रूम में पता चल जाएगा। इससे समस्या का त्वरित निस्तारण किया जा सकेगा। परियोजना का ट्रायल शुरू कर दिया गया है।
स्मार्ट सिटी की सीईओ सोनिका ने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के साथ ही स्काडा का काम भी शुरू किया गया था। अब यह प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। इसे ट्रायल के तौर पर एक अप्रैल से संचालित किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत जल संस्थान के 206 ट्यूबवेल, 11 बूस्टर पंपिंग स्टेशन और 72 ओवरहेड टैंक से 275 एमएलडी पानी की आपूर्ति की जा रही है।
स्काडा परियोजना में सॉफ्टवेयर के जरिये उत्तराखंड जल संस्थान को एक ही स्थान से पानी सप्लाई की पूरी जानकारी मिल रही है। कितना पानी सप्लाई हुआ, बूस्टरों में कितना पानी है, किस इलाके में कितना पानी जा रहा है। लीकेज और प्रेशर का पूरा विवरण सॉफ्टवेयर में प्रदर्शित होता है।
करोड़ों की बिजली बचाएगी तकनीक
यह सॉफ्टवेयर स्वचालित जल आपूर्ति के साथ ही ऊर्जा बचत पर भी काम करता है। पानी की सप्लाई में वर्तमान में सालाना लगभग 35 करोड़ रुपये की बिजली खर्च होती है। स्काडा सिस्टम से लगभग 15-20 प्रतिशत बिजली की बचत वर्तमान में की जा रही है।
मरम्मत के सालाना 4.5 करोड़ बचेंगे
पंपिंग स्टेशन और मशीनरी की वार्षिक मरम्मत पर लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। स्काडा सिस्टम लगाने वाली कंपनी अपने स्तर पर 10 वर्ष तक मरम्मत का काम करेगी, इससे सरकारी धन की बचत होगी।
हर समस्या पर रहेगी नजर
अभी किस क्षेत्र में कितने लीटर पानी की सप्लाई हो रही है। पानी आपूर्ति में असमानता समेत कई समस्याएं आती हैं। कुछ क्षेत्रों में पर्याप्त पानी रहता है, वहीं कई इलाके ऐसे हैं, जहां हमेशा किल्लत बनी रहती है। अब इस समस्या को स्काडा चिह्नित कर सकेंगे।
प्रेशर ट्रांसमीटर बताएगा कहां है समस्या
स्काडा ट्यूबवेल में लगे प्रेशर ट्रांसमीटर के जरिये सॉफ्टवेयर बताता रहेगा कि ट्यूबवेल से निकले पानी में कितना प्रेशर है और पाइपलाइन में कितना। प्रेशर कहां कम हो रहा है, यह भी पता चल सकेगा। इसी आधार पर लीकेज वाले प्वाइंट को चिह्नित किया जाएगा।