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- बायलॉज के अनुसार न नक्शा न होने पर आवेदक को सॉफ्टवेयर भेज रहा ई-मेल
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I मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) से अब सात दिन में मकान का नक्शा पास होने लगा है। यदि नक्शा बायलॉज के अनुसार नहीं पाया जाता है तो एमडीडीए का सॉफ्टवेयर आवेदक को होल्ड या रिजेक्ट का ई-मेल भेज रहा है। एमडीडीए अपने इस सॉफ्टवेयर पर काफी समय से प्रैक्टिस कर रहा था। सफलता मिलते ही एमडीडीए में फाइलों का अंबार कम होने लगा है।
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Iगौरतलब हो कि भवनों के नक्शे पास कराने के लिए आवेदकों को विकास प्राधिकरण के कई चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन, अब इस काम के लिए एमडीडीए ऑफिस जाने की जरूरत नहीं है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को पिछले एक साल में और भी प्रभावी बनाया गया है। ऑटोमैटेड डेवलप्ड कंट्रोल रूल्स सिस्टम से संचालित सॉफ्टवेयर बेहद पारदर्शिता के साथ नक्शे का आकलन करता है। इसमें बिल्डिंग बायलॉज के सभी प्रावधान फीड हैं। नक्शे को आर्किटेक्ट के सॉफ्टवेयर में अपलोड करते ही बायलॉज के प्रावधानों के अनुसार सिस्टम खुद परीक्षण करता है। कमी होने पर सॉफ्टवेयर उसे इंगित करता है।
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ऐसे करना होता है आवेदन
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Iप्राधिकरण की वेबसाइट http://mddaonline.in/ पर लॉगइन और रजिस्ट्रेशन करना होता है। आर्किटेक्ट इस कार्य में सहयोग करते हैं। अपने आवेदन के साथ ही जमीन का लैंडयूज, भवन स्वामी आदि का नाम, पता देकर नक्शा ऑनलाइन अपलोड करना होता है। नक्शे में कमी पाए जाने पर उसकी सूचना एसएमएस और ई-मेल के जरिये भवन मालिक और आर्किटेक्ट को दे दी जाती है।
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Iसॉफ्टवेयर बता देता है कमियां
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Iसॉफ्टवेयर सभी प्रकार की कमियों को चिह्नित करता है। अगर किसी प्लॉट में एफएआर ज्यादा है, सड़क की चौड़ाई कम है, सेटबैक कम छोड़ा गया है, भवन के सापेक्ष पार्किंग का स्थान कम है या भू उपयोग को लेकर किसी तरह की कोई आपत्ति है तो सॉफ्टवेयर उसे चिह्नित करता है और आवेदक को अवगत कराने के साथ ही नक्शा पेंडिंग कर देता है।
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Iखास है नया सॉफ्टवेयर
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I- आवेदक इसके जरिये अपनी फाइल आवेदन की स्थिति को ट्रेस कर सकते हैं।
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I- यह मास्टर प्लान से कनेक्ट है। इसके आधार पर प्लॉट का भू-उपयोग जन सकते हैं।
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I- विभिन्न सरकारी विभागों से आवश्यक एनओसी भी इससे प्राप्त की जा सकती है।I