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Dehradun News: बारिश न होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

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Iवर्तमान में गेहूं, मटर, जौ, मसूर और सरसो की हुई है बुआई
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I-21 दिन के भीतर पहली सिंचाई की होती है जरूरतI

नवंबर बीतने को है, लेकिन अभी तक बारिश नहीं हुई है। पर्वतीय क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। उन्हें फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है। रबी की फसलों की बुआई के लिए बारिश जरूरी होती है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित होना लाजमी है। वर्तमान में गेहूं के साथ ही मटर, जौ, मसूर, सरसों की बुआई का समय चल रहा है। क्षेत्र में सिंचाई के साधन सीमित हैं। अधिकांश खेती बारिश पर आधारित है।

कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एके शर्मा ने बताया कि गेंहू की बुआई के 21 दिन बाद सिंचाई जरूरी होती है। पर्वतीय क्षेत्रों में अक्तूबर के अंतिम सप्ताह और मैदानी इलाकों में नवंबर की शुरुआत में गेंहू की बुआई शुरू हो जाती है। कहा, किसान जमीन में बनी हल्की नमी के भरोसे बुआई कर सकते हैं, लेकिन 21 दिन के भीतर पहली सिंचाई जरूरी होती है। यदि यह सिंचाई बारिश से हो तो फसल के लिए अमृत के समान होती है।
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Iबारिश होती तो किसानों के लिए अच्छा रहता। जमीन में पर्याप्त नमी से फसल की अच्छी पैदावार होती। फिलहाल खेतों में सूखापन है। बारिश से बुआई के लिए पर्याप्त पानी मिल जाता है।
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Iचंद्रपाल शर्मा, निवासी सोरना
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Iबारिश न होने से पर्वतीय क्षेत्र के किसान बुआई के लिए अभी तक खेतों की जुताई नहीं कर सके हैं। इस कारण बुआई में देरी हो रही है। बारिश गेहूं और मटर के लिए जरूरी है।
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Iराजेेंद्र सिंह, निवासी बिरमोऊ
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Iजिन जगहों पर सिंचाई के साधन नहीं हैं, ऐसे अधिकांश जगहों पर किसानों ने अभी तक बुआई नहीं की है। नवंबर की बारिश किसानों को बड़ी राहत देती है।
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Iअंबादत्त जोशी, निवासी रुद्रपुरI



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Iवैसे तो नवंबर में बारिश कम ही होती है। औसतन 3-6 मिलीलीटर बारिश होती हैं। माह के अंत में प्रदेश में कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना बन रही है।
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Iविक्रम सिंह, निदेशक मौसम विज्ञान केंद्र देहरादूनI
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