Iजिले में 29 अस्पताल और 50 पशु सेवा केंद्रों का हो रहा संचालनI
भीषण गर्मी से इंसान हीं नहीं पशु भी बीमार पड़ने लगे हैं। पशुओं में डायरिया और डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) की शिकायत आने लगी है। स्थानीय पशु चिकित्सालयों में छह से सात बीमार पशुओं का रोजाना इलाज हो रहा है। पशुपालन विभाग की ओर से गर्मी से पशुओं के बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। जिले में भीषण गर्मी पड़ रही है। दून का तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है। गर्म हवाओं से इंसान से लेकर पशु-पक्षी बेहाल हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में तीन लाख गोवंशीय और करीब 1.25 लाख महिषवंशीय पशु हैं। जबकि तीन लाख से अधिक बकरियों का पालन हो रहा है। जिले में 29 बड़े क्षेत्रीय अस्पताल और 50 पशु सेवा केंद्र संचालित हैं।
गर्मी से पशुओं में डायरिया और पानी की कमी से डिहाइड्रेशन की शिकायत होने लगी है। इसमें बकरी, गोवंशीय और महिषवंशीय जैसे पशु शामिल हैं। बीते करीब एक माह से पशुओं में डायरिया के मामले बढ़े हैं। प्रतिदिन छह से सात पशुओं का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। जबकि कई पशुओं का घर पर ही उपचार किया जा रहा है। किसान अस्पताल में आकर लक्षण के आधार पर डॉक्टरों से सलाह लेकर अपने पशुओं की दवा ले रहे हैं।
Iदुधारू पशुओं का विशेष ख्याल रखने की जरूरतI
मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. विद्या सागर कापड़ी ने बताया कि भीषण गर्मी को देखते हुए खासकर दुधारू पशुओं का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। पशुओं के शरीर का तापमान बढ़ने से सांस लेने में परेशानी होती है। पशु की धड़कन बढ़ने लगती है। कभी-कभी चक्कर खाकर जमीन पर गिर जाता है। मुंह व नाक से झाग आने के साथ ही आंख और नाक लाल हो जाती है। डायरिया के कारण पशु बार-बार गोबर करने लगता है। चारा कम खाना है, जिससे वह कमजोर हो जाता है।
Iकिसान अपने पशुओं का ऐसे करें बचावI
तेज गर्मी में पशुओं को बाहर न छोड़ें। दिन में दो से तीन बार नहलाएं। अधिक से अधिक समय छांव में रखें। दिन में दो से तीन बार पशु को पानी पिलाएं। बकरी पालन करने वाले किसान प्रयास करें कि तेज धूप में बकरियों को न चराएं। पशुओं को किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर अपने नजदीक के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों से ही उपचार कराएं।