नगर निगम क्षेत्र में कई जगह अवैध हाट-बाजार सज रहे हैं। हाट-बाजार लगाने के लिए न तो निगम को टैक्स दिया जा रहा है और न ही इसकी अनुमति ली जा रही है। इसके बावजूद नगर निगम इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है।
दरअसल, पहले ग्रामीण क्षेत्रों में ही हाट बाजार लगाए जाते हैं। लेकिन अब कुछ लोगों की ओर से नगर निगम क्षेत्र में भी हाट बाजार लगाए जा रहे हैं। हाट बाजार संचालकों की ओर से यहां लगने वाली दुकानों से वसूली कर लाखों रुपये कमाया जा रहा है। हर फल, सब्जी, कपड़े की ठेली से प्रति ठेली दो रुपये वसूल रहे हैं। लेकिन इनमें से निगम को ढेला भर भी नहीं दे रहे हैं। जबकि नगर क्षेत्र में लगने वाले हाट बाजार या अन्य ऐसे कारोबार के लिए निगम की एनओसी और रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
Iदुकानदारों को वेरिफिकेशन तक नहीं होताI
हाट बाजारों में अधिकतर दुकान लगाने वाले बाहरी होते हैं। लेकिन इनमें से अधिकतर का वेरिफिकेशन नहीं होता है। इससे निगम के ग्रामीण क्षेत्रों में कभी भी कोई अनहोनी घटना होने की आशंका बनी रहती है। लेकिन इसके बाद भी निगम के साथ पुलिस भी इन हाट बाजारों को लेकर आंखें बंद किए रहती है। जबकि हाट बाजारों में काफी भीड़ होती है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम न के बराबर रहते हैं।
Iदिनवार सजाए जाते हैं बाजारI
हाट बाजार मुख्य रूप से शहर से सटे ग्रामीण इलाकों में लगाए जा रहे हैं। इनमें बनियावाला, बड़ोवाला, शिमलाबाई पास, नथुवावाला सहित विभिन्न क्षेत्र शामिल है। इनमें से एक ही ठेकेदार की ओर से कई जगह अलग-अलग दिनों में बाजार सजाया जा रहा है। कहीं सोमवार, कहीं बुधवार तो कहीं शुक्रवार हाट बाजार लगाए जा रहे हैं।
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Iबिना अनुमति के अगर कहीं हाट बाजार लग रहे हैं तो वह गलत है। इसके लिए निगम की अनुमति लेनी जरूरी है। अगर कोई बिना अनुमति के हाट बाजार लगाता है तो, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - राहुल कैंथोला, कर अधीक्षक भूमिI