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अपराध की प्रकृति बदली, साइबर अपराध नई चुनौती : राज्यपाल

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शहर में क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन शुक्रवार को हयात सेंट्रिक में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने किया। उन्होंने कहा कि आज अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही है, जिसमें साइबर अपराध, खासकर डिजिटल फ्रॉड और ड्रग्स से जुड़े मामले नए खतरे बन चुके हैं। ऐसे समय में युवाओं के लिए तकनीकी जागरूकता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। उस लिहाज से यह फेस्टिवल समाज में सतर्कता, संवेदनशीलता और नई सोच को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम है। फेस्टिवल के चेयरमैन व पूर्व डीजीपी उत्तराखंड अशोक कुमार ने कहा कि यह क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल का तीसरा संस्करण है, जिसमें अगले तीन दिनों में नशे की रोकथाम, सड़क हादसे, महिलाओं की सुरक्षा, साइबर अपराध और समाज को गहराई से प्रभावित करने वाले कई अन्य मुद्दों पर अर्थ पूर्ण चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम का शुरुआत मिर्च मसाला टू मांझी सत्र से हुई, जिसमें निर्देशक केतन मेहता और पूर्व डीजी उत्तराखंड आलोक लाल ने संवाद किया। इस दौरान निर्माता केतन ने कहा कि अपराध हमेशा से मेरे लिए सबसे आकर्षक विधाओं में से एक रहा है। सिनेमा, साहित्य और रंगमंच की शुरुआत से ही अपराध सबसे प्रभावशाली विषयों में रहा है। मेरी कई फिल्में, चाहे मंगल पांडे हो, रंग रसिया हो या मिर्च मसाला, अपराध और मानवीय संघर्ष के अलग-अलग आयामों को तलाशती हैं। एक व्यक्ति अपराध की ओर क्यों मुड़ता है, उसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन मूल रूप से मनुष्य स्वयं संघर्षों से भरा प्राणी है। हमारे भीतर लगातार एक द्वंद्व चलता रहता है और इस आंतरिक संघर्ष को संभालना व नियंत्रित करना ही कई मायनों में जीवन का सार है।फेस्टिवल डायरेक्टर व पूर्व डीजी उत्तराखंड आलोक लाल ने कहा कि यह दुनिया का एकमात्र उत्सव है जो केवल अपराध विधा को समर्पित है। इसी मायने में यह वास्तव में एक मार्गदर्शक पहल है। यह उत्सव न केवल वास्तविक अपराधों, बल्कि काल्पनिक अपराधों की भी पड़ताल करता है, जिससे यह अपराध साहित्य पर चर्चा का एक ज्ञानवर्धक मंच बन जाता है। इस मौके पर फेस्टिवल सचिव रणधीर के अरोड़ा व कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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