सेलाकुई। प्रगति विहार में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन कथा व्यास कृष्ण शास्त्री ने राजा परीक्षित की जन्म से लेकर मृत्यु तक की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों से मौत को नजदीक ले आते हैं। कहा कि परीक्षित ने रास्ते में मिले मृत सर्प को एक ध्यानमग्न संत के गले में नहीं डाला होता, तो उन्हें सात दिनों के अंदर सर्प के डसने से मृत्यु का श्राप नहीं मिलता। कहा कि राज-पाट त्यागे राजा परीक्षित को वन में जब सुखदेव महाराज ने भागवत कथा सुनाई, तब उन्हें श्राप से मुक्ति मिली। उन्होंने श्रृष्टि के आरंभ और राजा मनु की संतानों की उत्पत्ति की कथा भी सुनाई। इस मौके पर काशीराम महावर, उमा देवी, दीपा, डोली, शालू, सुमित, अमित आदि उपस्थित रहे। संवाद