दून विश्वविद्यालय में तीन साल की देरी के बाद एक बार फिर नैक ग्रेड का सर्वे शुरू हो चुका है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से जारी गाइडलाइंस के अनुसार सभी शिक्षण संस्थानों को नैक से मान्यता पाना जरूरी है। अगर कोई संस्थान यहां से मान्यता नहीं लेता है तो उसे किसी सरकारी योजना का फायदा नहीं मिलता। आखिरी बार विवि में साल 2017 में नैक ग्रेड का सर्वे हुआ था तब विवि को बी++ का ग्रेड मिला था।
नैक विवि, कॉलेज व संस्थानों की गुणवत्ता परख कर उनको रेटिंग देता है। कॉलेज, विवि या अन्य उच्च शिक्षण संस्थान सभी मानकों को पूरा करने पर नैक ग्रेडिंग के लिए आवेदन करते हैं। आवेदन के बाद नैक की टीम निरीक्षण करती है। यह प्रक्रिया दून विवि की पूरी हो चुकी है। इसके बाद छात्रों का सर्वे किया जा रहा है। नैक ग्रेडिंग मिलने के बाद ये चार साल के लिए मान्य होता है।
विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा, नैक ग्रेड के लिए छात्रों का सर्वे चल रहा है। छात्रों का सर्वे पूरा होने के बाद करीब दो महीने में विवि को ग्रेड मिल जाएगा। बेहतर ग्रेड के लिए विवि में लगभग सभी कार्य किए गए हैं। इसका सीधा फायदा छात्रों को मिलेगा। साल 2017 में विवि को बी++ का ग्रेड मिला था। वहीं, तीन साल की देरी पर उन्होंने कहा, विवि में बहुत से काम होने थे तो बीते तीन साल में आवेदन नहीं किया गया।