डाकपत्थर बैराज के पुलों (हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाला पुल और शक्तिनहर पर बना डाकपत्थर कॉलोनी व डिग्री कॉलेज को जोड़ने वाला पुल) पर लोहे के गार्डर लगाकर भारी वाहनों की आवाजाही को पूर्णत: बंद कर दिया गया है। सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने सर्वे में पुलों को भारी वाहनों की आवाजाही के लिए खतरनाक बताया था।
डाकपत्थर बैराज के पुलों से संचालित होने वाले भारी वाहनों की आवाजाही को बंद करने के लिए पिछले दो साल से चल रही जलविद्युत निगम की कवायद को अंतिम रूप दे दिया गया। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी के बीच जल विद्युत निगम ने डाकपत्थर बैराज व शक्तिनहर के पुलों पर सात फिट ऊंचाई वाले लोहे के गार्डर लगा दिए। जलविद्युत निगम के महाप्रबंधक सिविल संजीव लोहानी ने बताया कि हाल के दिनों में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट के माध्यम से कराए गए सर्वे में पुलों को भारी वाहनों की आवाजाही के लिए खतरनाक पाया गया था। उन्होंने बताया कि आसन बैराज के पुलों से पहले से ही भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित है। डाकपत्थर में भी अब पूरी तरह से भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है।
खनन की गतिविधियों पर लगेगा अंकुश
कोतवाली प्रभारी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि गार्डर लग जाने के बाद अवैध खनन की गतिविधियां भी काफी हद तक नियंत्रण में आ जाएंगी। उन्होंने बताया कि डाकपत्थर बैराज के पास संचालित हो रहे खनन पट्टे व पट्टे की आड़ में अवैध रूप से खनन करके निकलने वाले वाहन डाकपत्थर बैराज के पुल से ही आवाजाही करते थे, जिसके चलते पुलों को खतरा बना हुआ था। उन्होंने कहा कि पुलों पर गार्डर लग जाने के बाद इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर भी नियंत्रण लग सकेगा।