गोविंद को यह पसंद नहीं था और वह इसका विरोध करता था। गोविंद ने पुलिस को बताया कि उसकी सास पुलिस में शिकायत करने की भी धमकी देती थी। इस मामले को लेकर कई बार गांव के लोगों ने राजीनामा भी करवाया लेकिन बात नहीं बनी।
गोविंद के अनुसार इन सब बातों के चलते उसने सास को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। 22 सितंबर को उसने चाकू लिया और सास प्रेमवती को काम दिलाने के बहाने बाइक से बरहैनी ले गया। इसके बाद दोनों बौर नदी के किनारे जंगल में गए। वहां उसने पहले चाकू से हमला किया और फिर पत्थरों से कुचलकर प्रेमवती की जान ले ली।