जौनसार बावर के ग्रामीण इलाकों में आटा पीसने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले घराटों (पनचक्की) के अस्तित्व पर संकट आ गया है। आपदा के बाद से बंद हुए 100 से ज्यादा घराट प्रशासन की लापरवाही के कारण अभी तक संचालित नहीं किए जा सके हैं। इसकी वजह से लोग बिजली से चलने वाली चक्कियों का रुख कर रहे हैं।
जौनसार बावर के ग्रामीण इलाकों में अधिकतर ग्रामीण पानी के प्रेशर से संचालित होने वाली चक्कियों जिन्हें घराट कहा जाता है, का पिसा आटा ही प्रयोग करते हैं। बताते चलें कि घराट या पनचक्की के पिसे आटे को शुद्ध, पौष्टिक व स्वादिष्ट माना जाता है। घराट के पिसे आटे की मांग को देेखते हुए हर एक गांव में कई-कई पनचक्की लगाई गई हैं। पिछले कई साल से क्षेत्र में आने वाली आपदा घराट के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही हैं। 2010 व 2013 में आई आपदा में क्षेत्र से होकर गुजरने वाली अमलावा नदी, बरसाती नालों के आसपास बनाए गए इन घराटों को काफी नुकसान पहुंचा था। पिछले महीने 25 सितंबर को आई आपदा से भी घराटों को नुकसान हुआ था। नदी व नालो में आए पानी और मलबे से घराटों को पानी की सप्लाई देने वाली सिंचाई गूल व अन्य व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई।
उधर आपदा के बाद प्रशासन की लापरवाही ने समस्या को और अधिक बढ़ाया। मलबे की सफाई व क्षतिग्रस्त हुई नहरों का निर्माण नहीं होने से घराटों को पानी की सप्लाई बंद हो गई, जिसके चलते भारी संख्या में घराट बंद पड़े हुए हैं। किमोठा गांव के मदन सिंह, राजेंद्र सिंह,अलसी गांव के भज्जू दास, पानुवा गांव के धना दास का कहना है कि कुछ स्थानों पर घराट स्वामियों ने अपने प्रयासों से पनचक्कियों को दोबारा से शुरू किया है लेकिन ज्यादातर स्थानों पर घराट बंद हा गए हैं। इसके अलावा गांवों में अब बिजली से संचालित होने वाली चक्कियां स्थापित की जा रही हैं। संवाद
साहिया के आसपास बंद पड़े घराट
जौनसार बावर में आपदा के कारण बंद होते जा रहे घराटों की संख्या 100 से अधिक है लेकिन पिछले महीने आई आपदा के बाद से ग्राम चरगाड़ खड में 07, ददोऊ खड में 06, ककाड़ी खड में 04, सुईनाड़ खड में 10, मौकाड़ खड में 04, अस्टी के चरगाड़ खड में 02, जमाड़ खड में 03, अच्छेड़ खड में 06, कोथी खड में 04, बुरांस्वा खड में 06 से अधिक पानी से चलने वाली चक्कियां बंद हो गई हैं।
सिंचाई व लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों को घराटों के आसपास आए मलबे व नहरों के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति के बारे में बताया गया है। इसके अलावा घराटों को दोबारा से शुरू कराने के लिए आवश्यक उपाय करने के लिए निर्देशित किया जा रहा है। - सौरभ असवाल, उप जिलाधिकारी कालसी