सहसपुर ब्लॉक के आठ गांवों की करीब 10 हजार की आबादी के लिए मानसून सीजन आफत लेकर आता है। दरेड़ नदी में पानी आने से ग्रामीणों को चार से आठ किलोमीटर का उल्टा फेरा लगाकर सड़क मार्ग तक पहुंचना पड़ता है। वर्ष 2012 में तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने पौंधा और मांडुवाला को जोड़ने के लिए सड़क और पुल के निर्माण की घोषणा की थी। इसका शासनादेश भी जारी हो गया था।
करीब 2.68 करोड़ रुपये की लागत से सड़क और दरेड़ नदी पर पुल का निर्माण होना था। 11 साल बीतने के बाद भी सड़क और पुल निर्माण की योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। स्थानीय लोगों को कहना है राजनीति के चलते योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सड़क और पुल का निर्माण न होने से हर साल मानसून सीजन में ग्रामीणों को समस्या होती है। नदी के उफान पर होने से छात्रों को छुट्टी लेकर घर बैठना पड़ता है। वहीं, बरसात में किसी की अचानक तबीयत खराब हो जाए या इमरजेंसी में कहीं जाना पड़े तो बड़ी दिक्कत उठानी पड़ती है।
Iइन गांवों के ग्रामीणों को होती है परेशानीI
कंडोली, कांसवाली, पौंधा, लोअर कंडोली, बस्कवाली, पालीवाली, गुसाईं गांव, फुलसनी।
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Iतत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने सड़क और पुल निर्माण की घोषणा की थी। शासनादेश भी जारी किया गया था। सीएम के हटते ही योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। हर साल स्थानीय ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ती है। लोगों की समस्या को देखते हुए सड़क और पुल का निर्माण जल्द होना चाहिए।
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Iमेघ सिंह, पूर्व जिला पंचायत
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Iसाडा ने 10 वर्ष पूर्व मांडुवाला में प्रिसीशन मशीन प्राइवेट लिमिटेड तक सड़क बनाई गई थी। अब सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है। उससे आगे आज तक सड़क का निर्माण नहीं हो पाया। कंडोली और आसपास के गांव वालों को डूंगा या फिर सुद्धोवाला से होकर गांव आना पड़ता है।
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Iमुकेश कुमार, ग्राम प्रधान, कंडोली
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Iसड़क और पुल का निर्माण बहुत जरूरी है। बरसात के सीजन में नौकरीपेशा, स्कूल और कॉलेज के छात्रों को काफी परेशानी होती है। इमरजेंसी में मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिए कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। सड़क और पुल निर्माण के लिए विभाग से पत्राचार भी किया गया है।
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Iकंचन, क्षेत्र पंचायत, सदस्य कंडोली
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Iबरसात में गांव वालों को बड़ी फजीहत झेलनी पड़ती है। नदी उफान पर होती है तो सड़क से संपर्क कट जाता है। एक किलोमीटर दूर सड़क तक जाने के लिए लोगों को डूंगा या सुद्धोवाला होकर आना पड़ता है। यह एक दिन की नहीं हर साल की समस्या है।
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Iप्रदीप कुमार, ग्रामीणI