एक उपभोक्ता ने एटीएम कार्ड से दो बार 10-10 हजार रुपये निकालने की कोशिश की, लेकिन रुपये नहीं निकले। हैरानी तब हुई जब बिना रुपये निकाले ही उनके खाते से 20 हजार रुपये कट गए। बैंक में संपर्क किया और एटीएम का सीसीटीवी फुटेज खंगालने का अनुरोध किया, लेकिन बैंक ने उनकी हर मांग को टाल दिया। इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को सेवा में कोताही को दोषी ठहराया है। आयोग के अध्यक्ष पुष्पेंद्र खरे की पीठ ने बैंक को 45 दिनों के भीतर 20 हजार रुपये की राशि लौटाने का निर्देश दिया है। साथ ही बैंक को मार्च 2022 से प्रतिदिन 100 रुपये के हिसाब से हर्जाना भी देने का आदेश दिया है। यह मुआवजा अंतिम भुगतान की तारीख तक देय होगा। यह राशि करीब सवा लाख रुपये बनती है। आयोग ने सेवा में कमी के लिए पांच हजार रुपये का मुकदमा खर्च भी उपभोक्ता को देने का निर्देश दिया है। यह मामला गुरवंत सिंह नामक उपभोक्ता ने दायर किया गया था, जिनका एसबीआई की जाखन शाखा में बचत खाता है। गुरवंत के अनुसार, उन्होंने 23 फरवरी 2022 को राजपुर रोड स्थित एसबीआई एटीएम से 10 हजार रुपये निकालने का प्रयास किया, लेकिन मशीन से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने तीन बार प्रयास किया, लेकिन हर बार रुपये नहीं निकले।। अगली तीन मार्च को उनके एसबीआई खाते से 10 हजार रुपये और फिर चार मार्च को 10 हजार डेबिट हो गए। इन दोनों कटौती का संदर्भ 23 फरवरी 2022 की एटीएम निकासी से जोड़ा गया था। आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक के 27 मई 2011 के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि शिकायत प्राप्त होने के सात कार्य दिवसों के भीतर उसका निवारण न होने पर प्रतिदिन 100 रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।