II- गर्मी की शुरुआत होते ही शहर में हो सकती है पानी की कमी
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I- शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में रोजाना पानी की लीकेज की समस्या रहती है
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Iशहर में जिस पानी से लाखों लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है, वह पेयजल लाइनों के लीकेज के कारण बर्बाद हो जाता है। मानकों की बात करें तो पेयजल लाइनों में लीकेज की अधिकतम सीमा पांच प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन दून में यह आंकड़ा 25 से 30 प्रतिशत के बीच है। इस हिसाब से देखा जाए तो दून में हर रोज करीब 63 एमएलडी पानी फिजूल में खर्च हो जाता है।
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Iमार्च का महीना बीत रहा है। गर्मी लगातार बढ़ रही है। बढ़ती गर्मी में लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ सकता है। दरअसल, हर साल गर्मी में दूनवासियों को पेयजल किल्लत से भी जूझना पड़ता है। पेयजल किल्लत का मुख्य कारण भूजल स्तर नीचे जाने के साथ ही स्रोतों से भी पानी का प्रभाव कम होना तो है ही इसका सबसे बड़ा दूसरा कारण पानी की लाइनों में लीकेज भी है। दून के चारों जोनों, दक्षिण, उत्तर, पित्थूवाला और रायपुर में कई पेयजल लाइनें ऐसी हैं, जो कई साल पुरानी हैं। कई लाइनें सड़क के नीचे दबी हैं। अगर लीकेज होता है तो इसके समाधान में कई दिन बीत जाते हैं।
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Iनिर्माण कार्यों के दौरान तोड़ी गई लाइनों से भी हर दिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न इलाकों में नई लाइनें भी बिछाई जा चुकी हैं। लेकिन, अब भी जल संस्थान लीकेज से हो रही पानी की बर्बादी को नहीं रोक पा रहा है।
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Iइन क्षेत्रों में बनी रहती है लीकेज की समस्या
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Iशहर में तमाम जगह पानी लीकेज की समस्या होने की वजह से समय पर पाइप लाइनों को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है। इनमें पटेलनगर, सुभाष रोड, रेसकोर्स, आराघर, घोसी गली, कचहरी रोड, चंदर नगर, ईसी रोड, सेवला कलां, माजरा, निरंजपुर और ऋषि विहार में पानी लीकेज की समस्या लगातार बनी रहती है।
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Iलीकेज से पानी की बर्बादी न हो इसके लिए सभी जोन के अधिशासी अभियंताओं को लीकेज पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पानी की बर्बादी न हो। गर्मी में पेयजल की दिक्कत न हो इसका प्लान तैयार किया जा रहा है। - नीलिमा गर्ग, मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थानI