जौनसार बावर और पछवादून क्षेत्र में पिछले एक दशक में चिकित्सा सुविधाओं में विस्तार हुआ है। लगातार पुराने अस्पतालों को अपग्रेड करने और चिकित्सा संसाधन युक्त बनाने का काम चल रहा है, लेकिन मरीजों तक सुविधाओं का लाभ पहुंचने में चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी आड़े आ रही है। अगर चिकित्सा के साथ मानव संसाधन को बढ़ाने की दिशा में ठोस कार्य किए जाएं, तो ही हर जरूरतमंद को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकती है।
सरकारी अस्पताल ही जौनसार बावर और पछवादून की स्वास्थ्य लाइफलाइन है। जनवरी 2020 में सीएचसी विकासनगर को उप जिला अस्पताल का दर्जा मिला था। यहां फिजिशियन और चर्म रोग विशेषज्ञ को छोड़कर सभी विशेषज्ञ हैं। अस्पताल में आईसीयू, वेंटिलेंटर, ऑक्सीजन प्लांट, अल्ट्रासाउंड आदि सुविधा उपलब्ध है। नई पैथोलॉजी लैब भी तैयार हो रही है। अस्पताल में तकनीकी स्टाफ, नर्स और जगह का अभाव चिकित्सा संसाधनों के संचालन में बाधा बन रहा है। हालांकि, उप जिला अस्पताल के विस्तार के तौर पर डाकपत्थर में 12.60 करोड़ की लागत से अस्पताल भवन लगभग बनकर तैयार है। यहां चिकित्सा सुविधा के विस्तार की उम्मीद है। हरबर्टपुर में 4.40 करोड़ से पीएचसी का अपना अस्पताल भवन बनकर तैयार हो गया है। अस्पताल का हस्तांतरण होना है, पर यहां भी चिकित्सक नहीं हैं। सीमांत तहसील क्षेत्र त्यूणी में 100 बेड के अस्पताल का निर्माण चल रहा है। प्रथम चरण में 30 बेड के अस्पताल का निर्माण पूरा हो गया है। अस्पताल का भवन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित होना है। नए भवन के निर्माण के बाद अस्पताल का उच्चीकरण होना है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साहिया में फिजिशियन, सर्जन और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो गई है। अस्पताल में बड़े ऑपरेशन की सुविधा के लिए एनेस्थेटिस्ट मिलने का इंतजार है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चकराता में भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती से उम्मीद जगी है, अब फिजिशियन, सर्जन और एनेस्थेटिस्ट मिलने का इंतजार है।
सीएमओ देहरादून डॉ. संजय जैन ने कहा कि एसडीएच और सीएचसी को चिकित्सा संसाधन युक्त कर विशेषज्ञों और अन्य कर्मचारियों की तैनाती का प्रयास किया जा रहा है। कई अस्पतालों में हाल में विशेषज्ञों की तैनाती हुई है। अस्पतालों में अन्य विशेषज्ञों और कर्मचारियों की भी नियुक्ति का प्रयास किया जा रहा है।