नगर निगम में पार्षदों के अधीन रही मोहल्ला स्वच्छता समितियों में गड़बड़ियों के रोज नए खुलासे हो रहे हैं। समितियों में कई कर्मचारी ऐसे रखे गए हैं, जिनके केवल नाम दर्ज हैं, पता नहीं। इसके अलावा, समितियों में एक नाम और पते के कई लोग काम कर रहे हैं। हैरत की बात है कि निगम का स्वास्थ्य अनुभाग पांच साल तक बिना जांच-पड़ताल के इन कर्मचारियों की वेतन की संस्तुति करता रहा। एक बार भी अनुभाग ने कर्मचारियों के नाम, पतों की पुष्टि नहीं की।
मोहल्ला स्वच्छता समितियों में गड़बड़ियों के क्रम में सूचना के अधिकार में एक और नया खुलासा हुआ है। मोहल्ला स्वच्छता समितियों में कई कर्मचारी ऐसे हैं जो बिना पते के दर्ज हैं। इसके अलावा एक ही वार्ड में दो-दो, तीन-तीन ऐसे कर्मचारी हैं, जो एक ही नाम और पते के हैं। हैरत की बात है कि पांच साल तक नगर निगम का स्वास्थ्य इन कर्मचारियों के लिए आंखें मूंदे रहा और उनके वेतन की संस्तुति करता रहा।
बिजनौर, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर, हरियाणा के तक के कर्मचारी
आरटीआई से मिली कर्मचारियों की लिस्ट में चार-पांच वार्डों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश वार्डों में संदिग्ध कर्मचारियों की तैनाती की गई है। कई वार्डों में ऋषिकेश, ऊधमसिंहनगर, रुड़की और उत्तर प्रदेश के बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और आजमगढ़ के लोगों के नाम दर्ज हैं। हरियाणा के भी लोग इन कर्मचारियों की लिस्ट में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सभी धर्मों के लोग भी कर्मचारियों की इस लिस्ट में शामिल हैं।
विदित है कि नगर निगम के पार्षदों के अधीन मोहल्ला स्वच्छता समितियों में बड़ी गड़बड़ी सामने आ रही है। प्रशासक सोनिका के निर्देश पर स्वच्छता समितियों में कार्यरत कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन शुरू हुआ तो नए-नए खुलासे हो रहे हैं। भौतिक सत्यापन के दौरान कई कर्मचारी मौके पर नहीं मिल रहे और पांच साल से उनका वेतन निरंतर जारी होता आ रहा है। इसके अलावा, कई कर्मचारियों का केवल नाम चल रहा है और उनकी जगह दूसरा व्यक्ति काम करता पाया जा रहा है।