नौ बार के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे अधिवक्ता मनमोहन कंडवाल ने दून क्लब के डेढ़ सदी पुराने नियमों को चुनौती दे दी। पेंट-शर्ट के स्थान पर शनिवार को कंडवाल धोती कुर्ता पहनकर पहुंच गए। उन्होंने स्वदेश में स्वदेशी परिधानों के साथ प्रवेश का मुद्दा उठाया, लेकिन क्लब के कर्मचारियों ने उन्हें अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। खासा हंगामा हुआ तो वहां अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी भी पहुंच गए। ऐसे में उन्हें समझाया गया और अगली आमसभा में इसे बदलने का प्रस्ताव लाने की बात कही।
दरअसल, मनमोहन कंडवाल शनिवार को दून क्लब में सदस्यता का फार्म लेने पहुंचे थे। उन्होंने सफेद धोती, काला कुर्ता और पहाड़ी टोपी पहनी हुई थी। जैसे ही वह मुख्य गेट के अंदर घुसे तो उन्हें सभी भौचक्के हो देखने लगे। हर कोई मनमोहन कंडवाल की ओर देखकर तमाम तरह की बातें करने लगा। जैसे ही वह मुख्य भवन के पास पहुंचे तो वहां गार्ड ने उन्हें रोक दिया। उन्हें धोती कुर्ते में प्रवेश ही नहीं करने दिया गया। उन्हें एक सदी पुराने क्लब के नियमों का हवाला दिया गया। बताया गया कि यहां पर केवल पेंट-शर्ट और चमड़े के जूते पहनकर ही प्रवेश किया जा सकता है। इस पर कंडवाल ने विरोध किया तो वहां भीड़ लग गई।
कंडवाल ने कहा कि देश आजाद हुए 75 साल हो गए। धीरे-धीरे गुलामी के सारे प्रतीकों को खत्म किया जा रहा है, लेकिन दून क्लब देहरादून का प्रतिष्ठित क्लब है, यहां पर बर्तानिया हुकूमत के नियम अब भी चल रहे हैं। भारतीय परिधान पहनने वालों को यहां दोयम दर्जे का समझा जाता है। कुछ देर बाद वहां पर दून क्लब लिमिटेड के अध्यक्ष सुनीत मेहता भी पहुंच गए। उन्होंने कंडवाल को समझाया और भविष्य में इस पर भी विचार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कंडवाल वहां से लौट आए।
पहली बार उठा परिधान का मुद्दा
बता दें कि दून क्लब के नियमों को लेकर बातें तो बहुत होती थीं, लेकिन यह मुद्दा पहली बार किसी ने व्यापक पैमाने पर उठाया है। अध्यक्ष मेहता ने बताया कि ऐसा नहीं है कि पुराने नियम बदले नहीं गए हैं। समय-समय पर कई नियमों को बदला गया है। क्लब में 2500 से ज्यादा सदस्य हैं। यह पहली बार उठाया गया मुद्दा है। ऐसे में अगली बार जो भी वार्षिक बैठक होगी, उसमें यह प्रस्ताव रखा जाएगा। यदि सदस्यों की सहमति हुई तो नियमों को बदल दिया जाएगा।
शुक्रवार को पुलिस से भी की गई थी शिकायत
ऐसे ही एक मामले में शुक्रवार को एक शिकायत पुलिस के पास पहुंची थी। एक व्यक्ति बिना ड्रेस कोड के पहुंचे तो उन्होंने पुलिस को मौखिक रूप से शिकायत की थी। लेकिन, स्थानीय पुलिस भी नियमों के अनुसार ही कार्रवाई कर सकती थी। ऐसे में इस शिकायत के आड़े भी सदी पुराने नियम आ गए।
गोल गले की टी-शर्ट में अध्यक्ष का फोटो वायरल
इस मामले से जुड़ी एक बात और भी सामने आ रही है। क्लब में केवल कॉलर वाली टी-शर्ट पहनकर ही आ सकते हैं। गोल गले (राउंड नेक) की टी-शर्ट भी मान्य नहीं है, लेकिन अध्यक्ष सुनीत मेहता का एक फोटो 15 अगस्त के दिन का वायरल हो रहा है। इसमें वह लाल गोल गले की टी-शर्ट और हॉफ पेंट पहने ध्वजारोहण करते दिख रहे हैं। यह फोटो इसी 15 अगस्त का बताया जा रहा है। हालांकि, अमर उजाला इसकी पुष्टि नहीं करता है।
1878 में बना था क्लब
दून क्लब अंग्रेज सरकार ने 1878 में बनाया था। यह पहले वर्तमान सुभाष रोड पर हुआ करता था। इस जगह पर अब सेंट जोसेफ स्कूल चलता है। कुछ साल के बाद क्लब के लिए वर्तमान जमीन को खरीदा गया और यहां पर इसका निर्माण कराया गया। 1901 में यह क्लब दून क्लब लिमिटेड हो गया।