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Dehradun News: दो बजते ही सचिवालय के अनुभागों में छा जाता है लंच ब्रेक से सन्नाटा, जानिए क्या कहता है शासनादेश

Thu, 17 Aug 2023 02:30 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

सूचना आयोग ने 2005 में एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत 4 जनवरी 2006 को शासन ने सरकारी कार्यालयों में लंच ब्रेक के समय निर्धारण का शासनादेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि लंच ब्रेक का समय दोपहर एक से ढाई बजे के बीच महज आधे घंटे का होगा। इस अवधि में ही प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को लंच ब्रेक लेना होगा।
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मीटिंग ( प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जैसे ही घड़ी की सुई दो पर पहुंचती है वैसे ही सचिवालय के सभी अनुभागों में एकसाथ लंच हो जाता है। इससे हर अनुभाग में सन्नाटा पसर जाता है। सरकार ने पहले जो शासनादेश जारी किया था, उसमें अधिकारियों-कर्मचारियों को एक साथ लंच ब्रेक पर जाने का प्रावधान नहीं था।

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काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीमुद्दीन की शिकायत पर सूचना आयोग ने 2005 में एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत 4 जनवरी 2006 को शासन ने सरकारी कार्यालयों में लंच ब्रेक के समय निर्धारण का शासनादेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि लंच ब्रेक का समय दोपहर एक से ढाई बजे के बीच महज आधे घंटे का होगा। इस अवधि में ही प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को लंच ब्रेक लेना होगा।

एक तिहाई कर्मचारी ही लंच ब्रेक पर जाएं
सचिवालय में अनुसचिव, अनुभाग अधिकारी व सभी कार्यालयों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, कार्यालय अधीक्षक और यहां इस नाम से अधिकार न हो वहां उनसे वरिष्ठ अधिकारी अपने कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के आधे घंटे के लंच ब्रेक का समय इस तरह निर्धारित करेंगे कि एक बार में करीब एक तिहाई कर्मचारी ही लंच ब्रेक पर जाएं। जहां पर एकल अधिकारी एवं एकल कर्मचारी होंगे, वहां वे आपस में लंच ब्रेक का समय इस तरह तय करेंगे कि उनमें से एक कार्यालय में जरूर मौजूद रहे।
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सूची टांगने का है प्रावधान
यह भी प्रावधान किया गया था कि लंच ब्रेक पर जाने वाले कर्मचारियों की सूची विभाग में टांगी जाएगी। बावजूद इसके अब माहौल उलट देखने को मिलता है। जैसे ही सचिवालय में दो बजे का समय होता है तो पूरे अनुभाग खाली हो जाते हैं। वरिष्ठ अधिकारी भी सीधे डेढ़ से दो घंटे के लिए लंच ब्रेक पर चले जाते हैं।

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ज्यादातर अनुभागों में इस नियम का पालन किया जा रहा है। कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि लंच में देरी हो जाती है, जिससे कुछ लोग एकसाथ लंच कर लेते हैं। - विनोद कुमार सुमन, सचिव, सचिवालय प्रशासन
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