- महर्षि दयानंद सरस्वती के योगदान को याद कर अर्पित किए श्रद्धासुमन
देहरादून। महर्षि दयानंद सरस्वती के 202वें जन्मोत्सव, ऋषि बोधोत्सव और आश्रम के 103वें स्थापना दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। धामावाला स्थित आर्य समाज मंदिर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य विद्यापति शास्त्री ने मंत्रोच्चारण के साथ किया। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर स्वागत गीत की प्रस्तुति दी गई। स्वामी सत्यव्रतानंद सरस्वती ने महर्षि के समाज के प्रति योगदान पर विचार रखे और संदेश दिया कि हमें जीवन में स्वाध्याय सदा करते रहना चाहिए। आचार्य अमित शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने ज्ञान व योग के माध्यम से शिवत्व को हृदय में धारण किया। डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि वेदों की ओर लौट चलो के नारे से समाज में जागरूकता आई और देश को नई दिशा मिली। आर्य समाज और आश्रम के प्रधान सुधीर गुलाटी ने कविता के माध्यम से महर्षि दयानंद सरस्वती के योगदान को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और आश्रम की स्थापना के 102 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी। इस मौके पर सुभाष चंद्र गोयल, ज्ञानचंद गुप्ता, शीला गुप्ता, स्नेहलता खट्टर, नारायण दत्त पंचाल, अश्विनी पंचाल, धीरेंद्र मोहन सचदेव, डॉ. आदित्य आर्य, प्रदीप मिश्रा, कुलभूषण कठपालिया, बसंत कुमार, देवेंद्र सैनी, पवन कुमार आर्य, अशोक कुमार, नवीन भट्ट आदि मौजूद रहे। संवाद