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Dehradun News: आम की बेमौसम फसल लेकर बागवानों को प्रेरित कर रहे महाबल नेगी

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विकासखंड चकराता के सिमोग निवासी बागवान महाबल नेगी इन दिनों देहरादून की मंडी में आम बेचकर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों में आम की फसल समाप्त होने के बाद वह अपने बाग से हर दिन अलग-अलग प्रजाति और स्वाद वाले ताजे आम मंडी और बाजारों को भेज रहे हैं।
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अगस्त-सितंबर के माह में ताजा आम बाजारों में दिखना आश्चर्य की बात है। लेकिन, देहरादून की मंडी में इन दिनों जौनसार बावर के प्रगतिशील बागवान महाबल नेगी के बाग के आम खूब बिक रहा है। ग्राम सिमोग निवासी महाबल नेगी अपने बगीचे में दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, मल्लिका, मीरा, रत्ना समेत कुल 16 प्रजाति के आमों की पैदावार कर रहे हैं। बगीचे में तैयार होने वाली आम की इन फसलों की विशेषता यह है कि यह 15 अगस्त से सितंबर के पहले सप्ताह तक बेचने लायक हो जाती है। महाबल बताते हैं कि देहरादून मंडी में उनके आम को 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिल रहा है।


बाग की मजदूरी करते हुए देखा बागवान बनने का सपना
महाबल नेगी 2002 में हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू में सेब के बगीचों में 55 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर काम करते थे। उस दौरान उन्होंने बागवान बनने का सपना देखा। सपने को साकार करने के लिए वह 2012 में अपने गांव लौट आए और जखाधार के पास बंजर पड़ी अपनी पैतृक जमीन पर पेड़ लगाना शुरू किया। समुद्रतल से 4,500 फीट की ऊंचाई पर लगाए जा रहे आम के बाग के लिए ग्रामीण उस समय उनका मजाक उड़ाते थे। ग्रामीणों का मानना था कि अत्याधिक ऊंचाई और ठंडा क्षेत्र होने के कारण आम के पौधे अगर लग भी गए तो उनमें फल नहीं आएंगे। ऐसा कुछ नहीं हुआ और महाबल की मेहनत रंग लाई और आज उनके 750 पेड़ों का बाग बेहतर उत्पादन दे रहा है।
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अन्य फलों का भी कर रहे उत्पादन

महाबल ने दो हेक्टेयर भूमि पर आम के अलावा अमरूद, अखरोट, कीवी, आडू, खुबानी, नाशपाती, संतरा, नींबू आदि के कुल 1,600 पौधे लगाए हैं। उनका लक्ष्य तीन हजार पौधे लगाने का है।
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रासायनिक खाद का नहीं करते हैं प्रयोग
महाबल अपने बगीचे में खाली जगह पर सब्जी की जैविक खेती भी करते हैं। उन्होंने बताया कि खाली जगह पर वह लौकी, तोरई, टमाटर, कद्दू, खीरा, शिमला मिर्च, सेम आदि का उत्पादन कर रहे हैं। खेती में वह किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद या दवा का प्रयोग नहीं करते हैं। उन्होंने बताया कि वह बगीचे के फलों और सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए गोमूत्र में विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटी मिलाकर स्वयं जैविक दवा तैयार करते हैं। इस दवा का छिड़काव कर फसलों को रोग व कीट आदि से बचाते हैं।
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