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Dehradun News: फेफड़े से सवा तीन किलो का ट्यूमर निकालकर बचाई जान

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II- एम्स ऋषिकेश में हुआ देहरादून के मरीज का ऑपरेशन
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I- मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ
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I एम्स के चिकित्सकों ने देहरादून के एक व्यक्ति की छाती की सर्जरी कर विशालकाय ट्यूमर निकालने में सफलता हासिल की है। रोगी के फेफड़ों में सवा तीन किलो का ट्यूमर था। मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है।
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Iविक्रम सिंह को जुलाई 2023 में छाती में दर्द की समस्या शुरू हुई थी। उन्होंने आसपास के अस्पतालों से लेकर राज्य के अन्य बड़े अस्पतालों में अपनी बीमारी का परीक्षण कराया। थोरेसिक सर्जन उपलब्ध नहीं होने के कारण जब कई अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए तो विक्रम की अंतिम उम्मीद एम्स अस्पताल पर आकर टिक गई।
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Iपिछले महीने एम्स पहुंचने पर विक्रम ने हृदय, छाती व रक्त-वाहिनी शल्य चिकित्सा (सीटीवीएस) विभाग के चिकित्सकों को अपनी समस्या से अवगत कराया। सीटी स्कैन कराने पर पता चला कि मरीज के बाएं फेफड़े पर एक विशालकाय ट्यूमर बन गया है, जो उस फेफड़े को पूरी तरह दबाने के साथ कभी भी दाएं फेफड़े को भी अपनी चपेट में ले सकता था।
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Iसीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. अंशुमान दरबारी ने बताया कि हाई रिस्क में होने के बाद भी ट्यूमर निकालने के लिए ओपन सर्जरी करने का निर्णय लिया गया। बीते 11 जून को उनकी टीम ने सर्जरी से मरीज की छाती खोलकर एक ही बार में पूरा ट्यूमर निकाल दिया। सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. दरबारी के अलावा सीटीवीएस विभाग के डॉ. अविनाश प्रकाश और एनेस्थेसिया विभाग के डॉ. अजय कुमार का विशेष योगदान रहा।
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Iग्रसित मरीज की छाती से निकाला गया ट्यूमर 22 गुणा 20 सेमी और 3.2 किलोग्राम वजन का है। क्रिटिकल केयर सपोर्ट और बेहतर नर्सिंग देखभाल की वजह से मरीज जल्दी रिकवर होने लगा और अब पूरी तरह स्वस्थ है। उन्होंने बताया कि रोगी का संपूर्ण इलाज राज्य सरकार की गोल्डन कार्ड योजना के तहत सरकारी दरों पर निशुल्क किया गया है। यह योजना रोगी के लिए वरदान साबित हुई है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि एम्स ऋषिकेश थोरेसिक और वक्ष से जुड़ी सभी बीमारियों का इलाज व सर्जरी करने में सक्षम है।
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Iक्या है थोरेसिक वक्ष सर्जरी
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Iथोरेसिक सर्जरी में छाती (वक्ष) के अंतर्गत हृदय और फेफड़ों के अलावा अन्नप्रणाली, श्वासनली आदि अंगों की सर्जरी शामिल है। फेफड़ों के ट्यूमर को हटाना व छाती में धमनी विकार की मरम्मत आदि सभी थोरेसिक सर्जरी की श्रेणी में आते हैं। उत्तराखंड के सभी सरकारी अस्पतालों में केवल एम्स ऋषिकेश ही अकेला सरकारी स्वास्थ्य संस्थान है, जहां थोरेसिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है।
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Iलिम्का बुक में दर्ज है डॉ. दरबारी की उपलब्धियां
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Iएम्स ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग के थोरेसिक सर्जन डाॅ. अंशुमान दरबारी का नाम वर्ष 2024 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। 13 सितंबर 2021 को एक मरीज की छाती से देश में अब तक के सबसे बड़े साइज के ट्यूमर (28 गुणा 24 सेमी, 3.8 किलोग्राम) को सफलता पूर्वक निकालने की उपलब्धि के लिए उनका इस बुक में नाम दर्ज हुआ है। वर्ष 2015 से अब तक डॉ. दरबारी इस तरह के विशालकाय थोरेसिक ट्यूमर वाले अन्य 11 मरीजों की मेजर सर्जरी कर चुके हैं।I
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